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रविवार, 28 मार्च, 2004 को 14:33 GMT तक के समाचार
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फ़िल्मी सितारों का राजनीति प्रेम

धर्मेंद्र
धर्मेंद्र राजस्थान से भाजपा के प्रत्याशी होंगे
चौदहवीं लोकसभा चुनाव के लिए हो रहे चुनावों को कई मायनों में अलग बताया जा रहा है. ऐसा है भी.

लेकिन फ़िल्मी सितारों में अचानक जिस तरह राजनीति को लेकर प्रेम जागा है वह इससे पहले कभी दिखाई नहीं दिया था.

ऐसा नहीं है कि फ़िल्मी सितारे पहले राजनीति में नहीं आते थे या चुनाव प्रचार नहीं करते थे लेकिन इस बार जिस तरह की भीड़ राजनीतिक दलों की ओर भागी है उसने कई सवाल और विवाद खड़े कर दिए.

शायद पहली बार इतनी संख्या में फ़िल्मी सितारे चुनाव लड़ रहे हैं.

कतार

पिछले कुछ विधानसभा चुनावों में यह तो दिख रहा था कि कई उम्मीदवार अपनी आर्थिक और व्यक्तिगत पहुँच के आधार पर कलाकारों को अपने मतदाताओं को रिझाने के लिए बुला रहे थे.

तीन पूर्व मिस इंडिया
ज़्यादातर कलाकारों के पास फ़िल्मों का कोई बड़ा काम नहीं है

लेकिन वह व्यक्तिगत स्तर पर ही था.

इस बार तो फ़िल्म और टेलीविज़न के कलाकारों की जो भीड़ राजनीतिक पार्टियों के कार्यालयों में जुटी वह अपने आपमें नया था.

हेमा मालिनी, मनोज कुमार और पूनम ढिल्लों से लेकर टेलीविज़न अभिनेत्री स्मृति ईरानी तक कई कलाकारों ने भाजपा का दामन थामा.

ऐसे में कांग्रेस क्यों पीछे रहती भला उसने भी तीन पूर्व मिस इंडिया ज़ीनत अमान, सलीना जेटली और नम्रता शिरोडकर और असरानी आदि को पार्टी कार्यालय के मंच पर ला खड़ा किया.

इसके बाद तो धर्मेंद्र, भूपेन हजारिका और गोविंदा आदि भी राजनीति में आने का ऐलान कर चुके हैं.

मज़े की बात यह थी कि हेमा मालिनी जैसे एकाध अपवाद को छोड़ दें तो ज़्यादातर कलाकार ऐसे हैं जिनको इस वक्त फ़िल्मों में कोई बड़ा काम नहीं मिल रहा है.

विवाद

फ़िल्मी सितारों में अचानक उमड़े इस प्रेम को लेकर चर्चाएँ चल ही रही थीं कि मुंबई के एक अख़बार मिड डे ने ख़बर छापी कि ये कलाकार कथित रुप से पैसे लेकर राजनीतिक दलों के साथ जा रहे हैं.

मनोज बाजपेयी
मनोज बाजपेयी ने भी कहा था कि उन्हें राजनीतिक दलों से प्रस्ताव मिला था

इस ख़बर ख़ासा विवाद खड़ा हो गया और कलाकारों की ओर से खंडनों का सिलसिला शुरु हो गया. राजनीतिक दलों ने भी इसका खंडन किया, भाजपा ने तो मानहानि का मुकदमा दायर करने की बात भी कही.

बीबीसी हिंदी के लिए अपने कॉलम में अभिनेता मनोज बाजपेयी ने भी कहा कि राजनीतिक दलों की ओर से उन्हें भी प्रस्ताव आया था. उन्होंने फ़िल्मी सितारों के राजनीतिक दलों से प्रेम पर सवाल भी उठाए.

इस बीच मिड डे ने एक और ख़बर छाप दी जिसमें कई कलाकारों ने बताया था कि उन्हें राजनीतिक दलों ने पैसे देकर प्रचार करने का प्रस्ताव दिया था.

चुनाव मैदान में

शायद यह पहले लोकसभा चुनाव होंगे जिसमें इतने फ़िल्मी सितारे चुनावी मैदान में होंगे.

गोविंदा और कांग्रेस के नेता
गोविंदा मुंबई उत्तर में केंद्रीय मंत्री राम नाईक के ख़िलाफ़ कांग्रेस उम्मीदवार होंगे

धर्मेंद्र भाजपा की ओर से राजस्थान के बीकानेर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं तो गोविंदा मुंबई से. भूपेन हजारिका असम की गुवाहाटी सीट से उम्मीदवार हैं.

विनोद खन्ना तो पंजाब से पिछले दो चुनाव लड़ चुके हैं वे एक बार फिर चुनाव लड़ रहे हैं.

प्रचार के लिए तो पता नहीं कितने कलाकार कहां कहां दिखाई देंगे.

मामला पुराना

हालांकि यह कहना ग़लत होगा कि फ़िल्मी कलाकारों का राजनीति प्रेम नया है या राजनीतिक दलों का कलाकार प्रेम नया है.

भाजपा दीपिका चिखलिया, अरविंद त्रिवेदी, नीतीश भारद्वाज को चुनाव लड़वाकर लोकसभा में भेज चुकी है.

शत्रुघ्न सिन्हा तो भाजपा के पुराने साथी हैं और राजनीति में गंभीरता से आकर मंत्री भी बन गए हैं. मंत्री तो विनोद खन्ना भी बन गए हैं.

कांग्रेस ने अमिताभ बच्चन को इलाहाबाद से चुनाव लड़वाया था और वैजयंती माला बाली को राज्यसभा का सदस्य बनाया था.

फिर राजेश खन्ना चुनाव लड़ते रहे और प्रचार करते रहे और दिलीप कुमार कांग्रेस की टिकट पर राज्यसभा में पहुँच गए.

हालांकि हिंदी सिनेमा के कम ही कलाकार दक्षिण भारतीय कलाकारों की तरह राजनीति में गंभीरता से रह पाए हैं और उनकी तरह शीर्ष तक पहुँच पाए हैं.

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