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शनिवार, 20 मार्च, 2004 को 19:21 GMT तक के समाचार
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सत्ता मिले तो क्या करेंगे आप?

बीबीसी कारवाँ
मंच का संचालन किया अनुराधा प्रीतम ने
अगर सत्ता मेरे हाथ में हो तो जी करता है कि क्या क्या न करूँ.
तारे ज़मीन पर उतार दूँ या आसमान में उड़ान भरूँ
या फिर ज़मीन चीर कर सारी समस्याओं को उसमे दफ़ना दूँ.

लेकिन अगर बात बीबीसी की हो और सत्ता हो श्रोताओं के हवाले तो क्या हो?

राय और विचार बेबाक बिना लाग लपट के बिहार शरीफ़ में श्रोताओं का मत सामने था.

वहाँ के नुसरा गाँव के प्राथमिक शिक्षक रमेश कुमार सिन्हा, " अगर मैं सत्ता में होता तो वही करता जो लोग आज कर रहे हैं. क्योंकि यहाँ भ्रष्टाचार है जितनी चरम सीमा पर है कि हृदय में कसक उठती है कि अगर मौक़ा मिले तो उन भ्रष्टाचारियों को तेल की खौलती कड़ाही में डाल दूँ."

आसान नहीं

लेकिन ये सत्ता है नहीं आसान फिर भी मिल ही जाय तो क्या कुछ करने की तमन्ना नहीं होती.

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लोगों ने इस विषय पर खुल पर विचार व्यक्त किए

बिहार शरीफ़ के पास के गाँव शेख़पुरा से बीए पास छात्र नरेंद्र कुमार सिंह, "पहले तो यदि सत्ता मिलनी हो तो हिंदुस्तान की थोड़ी आसान हो सकती है लेकिन बिहार की सत्ता बहुत मुश्किल है. यदि बिहार शरीफ़ की सत्ता मेरे हाथ में होती तो यहाँ जो छोटे छोटे स्कूल हैं जो पाँच सौ से लेकर हज़ार रूपए देने के बाद टीचर को रखते हैं मैं सबसे पहले उनके विरूद्ध कार्रवाई करता या एक संगठन बना कर उनसे लड़ाई करता."

और बात जब लड़ाई तक आ गई तो बम पटाखे तो छूटना ही था.

परवलपुर के सुनील कुमार के पास अगर सत्ता हो तो क्या करें सुनिए उन्ही की ज़ुबानी, " अगर मैं सत्ता में होता तो परमाणु बम बना कर निर्यात करता और उससे मिले पैसों को ग़रीबों में बाँट देता."

तो अगर कहीं अधिकारों की लड़ाई के लिए परमाणु बम तक के इस्तेमाल के अरमान सुनाई दिए तो वहीं रंग भरे सपने लिए छोटी सी आशा भी थी.

अगर सत्ता छज्जू महल्ला के मोहम्मद क़मर अली के पास होती तो वो क्या करते, "अगर मैं सत्ता में आ गया तो फ़ुटबॉल के लिए एक अच्छा मैदान बनाऊँगा."

निराशा

श्रोताओं में से कुछ ने तो सत्ता की बात को बड़ी गंभीरता से लिया और उनकी बातों से छलकी असली सत्ताधारियों के प्रति निराशा.

 अगर मैं सत्ता में होता तो वही करता जो लोग आज कर रहे हैं. क्योंकि यहाँ भ्रष्टाचार है जितनी चरम सीमा पर है कि हृदय में कसक उठती है कि अगर मौक़ा मिले तो उन भ्रष्टाचारियों को तेल की खौलती कड़ाही में डाल दूँ
शिक्षक रमेश कुमार सिन्हा

एक व्यक्ति ने कहा, "अगर मैं सत्ता में होता तो ग़रीबी, शिक्षा, सुरक्षा पर विशेष ध्यान देता और कभी भी लुभावने डींग हाँक कर भोली जनता को गुमराह नहीं करता."

कार्यक्रम जैसे-जैसे आगे बढ़ा परिचर्चा गंभीर होती गई हिलसा आए मोहन कुमार ने जब माईक थामा तो गाज गिरी जनता पर ही.

उन्होंने कहा, "मेरे हाथ में अगर सत्ता होती तो मैं कुछ भी नहीं कर पाता कारण कि हमारे मतदाता ग़लत लोगों को चुन कर भेजते हैं. आज पूरे भारत में विधान सभा और विधान परिषद के सदस्यों में बड़ी संख्या में अपराधी चरित्र के लोग हैं. उन्हे कौन चुन कर भेजता है हम मतदाता ही तो."

बहरहाल श्रोताओं के बीच मौजूद लोकेश कुमार ने सत्ता और शासन में व्याप्त कथित गंदगी को हटाने का एक नायाब तरीक़ा सुझाया. वो लोगों को कितना पसंद आया आप ख़ुद ही अंदाज़ा लगा सकते हैं.

उन्होंने कहा, "अगर मैं सत्ता में होता तो शासन महिलाओं के हाथों में सौंप देता क्योंकि महिलाएँ सहनशील होती हैं और अहिंसा में विश्वास करती हैं."

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