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संगमा टीएमसी में, वीसी शुक्ला भाजपा में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी (एनसीपी) से कुछ दिन पहले अलग हुए दो धड़े अलग-अलग पार्टियों में शामिल हो गए हैं. पार्टी के चुनाव चिन्ह पर दावा हारने के बाद पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा ने ममता बैनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल होने का फ़ैसला किया है. जबकि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में प्रभाव रखने वाले विद्याचरण शुक्ला शनिवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. विद्याचरण शुक्ला काँग्रेस पार्टी के लंबे समय तक सदस्य रहे लेकिन वे 1989 में वीपी सिंह के साथ जनता दल में भी चले गए थे और बाद में चंद्रशेखर की पार्टी समाजवादी जनता पार्टी में भी. ग़ौरतलब है कि काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के विदेश मूल के विरोध में शरद पवार, पीए संगमा और तारीक़ अनवर ने अलग होकर राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नाम से अलग पार्टी बनाई थी. लेकिन काँग्रेस के समर्थन को लेकर ही इस साल जनवरी में पार्टी में फूट पड़ गई. पीए संगमा का कहना था कि जब पार्टी का गठन ही सोनिया के विदेश मूल के मुद्दे पर हुआ था तो उनके साथ हाथ कैसे मिलाया जा सकता है. हालांकि यह पार्टी पिछले लगभग चार साल से महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार चला रही है. विघटन के बाद पवार गुट ने दावा किया था कि उनका गुट ही असली पार्टी है और पार्टी के चुनाव चिन्ह घड़ी पर भी उसी का हक़ है. संगमा गुट ने चुनाव चिन्ह पर अपना दावा पेश किया था लेकिन चुनाव आयोग ने घड़ी निशान शरद पवार गुट को ही दे दिया. |
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