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कश्मीर में मानवाधिकार पर चिंता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान ने कहा है कि भारत-पाकिस्तान बातचीत के लिए बेहतर माहौल बनाने के लिए ज़रूरी है कि भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर रोक लगाई जाए. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मसूद ख़ान ने ये विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि भारत को इस बारे में पता है. उनका कहना था, "राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कुछ नाज़ुक और मुश्किल फ़ैसले लिए हैं. लेकिन सब मुद्दों पर वार्ता के लिए ज़रूरी है कि कश्मीर में माहौल बेहतर हो." मसूद ख़ान ने कहा कि वार्ता से तब ही नतीजे निकल सकेंगे. उनका कहना था कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो माहौल अच्छा नही रहेगा. जब उनसे भारतीय कश्मीर में जारी चरमपंथी घटनाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दोषारोपण से कुछ हासिल नहीं होगा. कश्मीरियों की भागेदारी उनका कहना था कि भारत प्रशासित कश्मीर में लोगों को विश्वास में लेना होगा तब ही कश्मीरी जनता शांति प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए सामने आएगी. इस विषय में पाकिस्तान का बयान तब आया है जब भारतीय कश्मीर में अलगाववादी संगठनों ने सुरक्षाकर्मियों के कथित मानवाधिकार उल्लंघन का ज़ोरदार विरोध किया है. हाल में भारतीय सुरक्षा बलों पर बांदीपुर में कुछ स्थानीय लोगों पर गोली चलाकर मार देने के आरोप लगे थे. मौलवी अब्बास अंसारी के नेतृत्व वाले ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के गुट ने उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के साथ चल रही बातचीत से पीछे हटने की धमकी भी दे डाली थी. भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर में बाड़ लगाए जाने का एक और मुद्दा है जिस पर भारत और पाकिस्तान में मतभेद हैं. भारत अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर बाड़ लगाने का काम कर रहा है लेकिन पाकिस्तान मानता है कि ये संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन है. |
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