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'भारत उदय' ख़र्च पर सवालिया निशान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से 'भारत उदय' अभियान पर ख़र्च होने वाली राशि का हिसाब देने को कहा है. इस बारे में एक बेरोज़गार युवक ने याचिका दायर की है जो जानना चाहता है करदाताओं का पैसा अपनी उपलब्धियों के बखान पर ख़र्च करने का सरकार को क्या अधिकार है. इस युवक ने इस बारे में टेलीविज़न पर दिखाए जा रहे विज्ञापनों और बड़ी-बड़ी होर्डिंग के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं. याचिका दायर करने वाले के वकील सिद्धार्थ मृदुल ने पत्रकारों से कहा कि अदालत ने सरकार को यह बताने का निर्देश दिया है कि इतनी बड़ी राशि किस प्रावधान के तहत ख़र्च की जा रही है. इस याचिका पर दस मार्च को अगली सुनवाई होगी. सरकार का पक्ष बुधवार को बहस के दौरान सरकारी वकील संजय जैन ने कहा कि यह सरकार के अधिकारों के दायरे में शामिल है कि वह लोगों को अपनी उपलब्धियों के बारे में बताए. उन्होंने कहा कि विगत में कई सरकारों ने ऐसा किया है. चुनाव आयोग ने पिछले हफ़्ते इस तरह के अभियान पर तब पाबंदी लगा दी थी जब चुनाव की तारीख़ों की घोषणा की गई थी. आयोग का कहना था कि इस तरह के अभियान से मतदाता प्रभावित हो सकते हैं. विपक्षी दलों ने भी वित्त और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालयों सहित अन्य विभागों के ऐसे प्रचार अभियानों पर विरोध प्रकट किया था. |
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