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जयललिता की याचिका ख़ारिज | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसमें उन्होंने बेनामी संपत्ति से जुड़े मामलों को बंगलौर से पांडिचेरी, आंध्र प्रदेश या केरल स्थानांतरित करने की अपील की थी. न्यायमूर्ति एसएन वरियावा और न्यायमूर्ति एचके सेमा की खंडपीठ ने कहा, "जयललिता अदालत के पहले के आदेश में संशोधन का कोई आधार नहीं दे पाई हैं." उल्लेखनीय है कि 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति रखने के दो मामलों को इस टिप्पणी के साथ बंगलौर स्थानांतरित करने का आदेश दिया था कि तमिलनाडु में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने की आशंका है. ताज़ा फ़ैसले का ब्योरा देते हुए कर्नाटक सरकार के वकील संजय हेगड़े ने बीबीसी हिंदी को बताया, "सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज करते हुए ये कहा है कि उन्हें कोई संदेह नहीं कि (बंगलौर में) निष्पक्ष सुनवाई चलेगी और एक लोकतांत्रिक देश में जहाँ क़ानून का शासन है, उन्हें कोई संदेह नहीं कि न्यायपालिका अपना काम निष्पक्षता से करेगी." सुप्रीम कोर्ट ने द्रमुक नेता के अंबज़ग़न की याचिका पर मामलों की सुनवाई तमिलनाडु से बाहर कराने का फ़ैसला दिया था. अदालत ने इस बात पर सख़्त आपत्ति जताई थी कि जयललिता चेन्नई में सुनवाई करने वाली अदालत में एक भी बार उपस्थित नहीं हुईं. सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक उच्च न्यायालय को जयललिता के मामलोंकी सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत के गठन का निर्देश दिया है. |
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