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जयललिता केंद्र सरकार से ख़फ़ा हैं
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने केंद्र सरकार की उस अधिसूचना पर कड़ा ऐतराज़ जताया है जिसमें कहा गया है कि ढाई सौ करोड़ रुपए से ज़्यादा लागत वाली कोई भी इमारत बनाने से पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से स्वीकृति लेनी ज़रूरी है. जयललिता ने कहा है कि केंद्र सरकार ऐसा करके राज्यों के अधिकारों को हथियाना चाहती है. जयललिता ने केंद्र सरकार की इस अधिसूचना का सामूहिक रूप से विरोध करने के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भी लिखा है. इस पत्र में जयललिता ने कहा है कि केंद्र सरकार की अधिसूचना लोकतांत्रिक तरीक़े से विकेंद्रीकरण की पूरी प्रक्रिया के ख़िलाफ़ है. सारा मामला उस समय शुरू हुआ जब पिछले दिनों जयललिता ने क़रीब 20 अरब रुपए की लागत वाली राज्य सचिवालय की नई इमारत की आधारशिला रखी थी. जयललिता की नाराज़गी इसलिए भी है कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री टीआर बालू राज्य में उनकी विरोधी पार्टी द्रमुक के सदस्य हैं. अधिसूचना केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार किसी भी भवन निर्माण में अगर क़रीब ढाई सौ करोड़ रुपए से ज़्यादा ख़र्च हों तो इसके लिए पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से स्वीकृति लेनी पड़ेगी.
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने ही पिछले दिनों समुद्री किनारे पर स्थित किसी भी इमारत को तोड़ने या नए भवन निर्माण पर रोक लगा दी थी. मंत्रालय का यह आदेश उस समय आया था जब जयललिता ने समुद्री किनारे पर स्थित क़रीब सौ साल पुराने महिला कॉलेज की इमारत को तोड़कर सचिवालय बनवाने की घोषणा की थी. बाद में अदालत ने भी इस पर रोक लगा दी थी. उसके बाद राज्य सरकार ने सचिवालय की नई इमारत बनवाने के लिए दूसरा स्थान चुना. |
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