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जयललिता तांसी ज़मीन घोटाले में बरी
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को तांसी भूमि मामले में बरी कर दिया है. सोमवार को कोर्ट ने इस मामले में चेन्नई हाई कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया. लेकिन अदालत ने इस मामले में मुख्यमंत्री जयललिता के कामकाज पर गंभीर टिप्पणी भी की. जस्टिस एस राजेंद्र बाबू और जस्टिस पीवी रेड्डी की खंडपीठ ने अपने फ़ैसले में कहा, "हालाँकि तांसी ज़मीन की बिक्री में जयललिता के शामिल होने का संदेह है, लेकिन इसे साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है." चेन्नई की निचली अदालत ने तांसी ज़मीन घोटाले में जयललिता को दोषी ठहराते हुए एक मामले में उन्हें तीन साल की और दूसरे में दो साल के क़ैद की सज़ा सुनाई थी. जयललिता पर आरोप थे कि उन्होंने सरकारी ज़मीन जया पब्लिकेशंस को बेच दिए थे.
लेकिन बाद में हाई कोर्ट ने जयललिता को भ्रष्टाचार के इन दोनों मामलों से बरी कर दिया. जिसके बाद ही सितंबर 2001 में उनके राज्य के मुख्यमंत्री का पद संभालने का रास्ता साफ़ हुआ था. जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी और आर साई भारती ने हाई कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि निचली अदालत और चेन्नई हाई कोर्ट के फ़ैसले का अध्ययन करने के बाद वे इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि हाई कोर्ट के फ़ैसले में दखल देने के लिए कोई आधार नहीं है. लेकिन खंडपीठ ने अपना फ़ैसला सुनाते हुए जयललिता पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा, "सुशासन के लिए सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी की ज़रूरत होती है. जयललिता को स्वयं ही इस पूरे विवाद पर प्रायश्चित करना चाहिए." |
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