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सोमवार, 09 फ़रवरी, 2004 को 12:22 GMT तक के समाचार
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चंद्रिका पर सत्ता के लालच का आरोप
राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा और प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच लंबे समय से राजनीतिक अनबन चल रही थी
श्रीलंका प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के एक प्रवक्ता ने संसद को भंग करने और नए चुनाव कराने की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा की घोषणा को अलोकतांत्रिक फ़ैसला क़रार दिया है और इसे एक स्वार्थी क़दम बताया है.

सरकार के प्रवक्ता जीएर पीरिस ने पत्रकारों को बताया कि राष्ट्रपति की इस घोषणा का देश के हित से कुछ लेना-देना नहीं है, यह सबकुछ सत्ता हथियाने के लिए किया जा रहा है.

शनिवार को श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने अचानक संसद भंग करके चुनाव की घोषणा कर दी थी.

225 सदस्यों वाली श्रीलंका की संसद के लिए दो अप्रैल को मत डाले जाएँगे.

कोलंबो में बीबीसी संवाददाता फ्रांसिस हैरिसन का कहना है कि राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा के समर्थकों ने इस घोषणा का स्वागत किया है और इसे देश को अराजकता से बचाने वाला एक क़दम बताया है.

दूसरी तरफ़ प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के प्रवक्ता ने कहा कि लोकतांत्रिरक दुनिया में इसे एक अभूतपूर्व क़दम ही कहा जाएगा कि सरकार को संसद में स्पष्ट बहुमत हासिल हो लेकिन फिर भी संसद भंग कर दी जाए.

प्रवक्ता पीरिस ने कहा कि राष्ट्रपति कुमारतुंगा सिर्फ़ सत्ता के लालच में पड़ी हुई हैं इसलिए उनकी साख भी गिर रही है.

"देश के लोगों ने हमें सरकार चलाने के लिए स्पष्ट बहुमत दिया था लेकिन राष्ट्रपति ने अपने स्वार्थों और राजनीतिक महत्वाकाँक्षाओं के लिए उसे दरकिनार कर दिया है."

लेकिन राष्ट्रपति के समर्थकों का कहना है कि देश को अराजकता और अस्थिरता से बचाने के लिए ऐसा किया गया है.

राष्ट्रपति के समर्थकों ने सरकारी मीडिया पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

तमिल विद्रोहियों ने भी कहा है कि श्रीलंका में जिस तरह की राजनीतिक अस्थिरता है उसकी वजह से शांति प्रक्रिया ख़तरे में पड़ गई है.

खींचतान

श्रीलंका में दिसंबर 2001 के चुनाव के बाद से ही राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा और प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के बीच अनबन चल रही थी.

राष्ट्रपति कुमारतुंगा की पार्टी पीपुल्स एलायंस को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था.

पिछले साल के अंत में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच राजनीतिक मतभेद चरम सीमा पर पहुँच गए.

नवंबर महीने में राष्ट्रपति ने विक्रमसिंघे सरकार के रक्षा, गृह और सूचना मंत्री को बर्ख़ास्त कर दिया था.

इसके बाद से दोनों के बीच सत्ता की खींचतान और बढ़ी है.

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