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सोमवार, 09 फ़रवरी, 2004 को 07:55 GMT तक के समाचार
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बच्चों की ओर से बच्चों का अख़बार

बच्चों का अख़बार
बच्चों के अख़बार में देश भर के विभिन्न हिस्सों के बच्चों के समाचार भी रहते हैं
बच्चों के लिए एक से एक खिलौने और कंप्यूटर जैसी चीज़ें तो बहुत दिखती हैं लेकिन क्या आपने बच्चों के अख़बार के बारे में सुना है?

उस पर दिलचस्प बात ये है कि बच्चे सिर्फ़ इस अख़बार के पाठक ही नहीं रिपोर्टर भी हैं.

देहरादून स्थित स्वयंसेवी संस्था हेस्को ने बाल जागरूकता के साथ ही बच्चों में सामाजिकता और रचनात्मकता विकसित करने के लिए ये अख़बार शुरू किया है.

इस बाल अख़बार में बच्चों से जुड़ी देश-विदेश की ख़बरें तो होती ही हैं साथ ही देश के दूर-दराज़ इलाक़ों के बच्चे अपने गाँव-शहर की ख़बरें भी भेजते हैं.

मिसाल के तौर पर किस स्कूल में कंप्यूटर की पढ़ाई शुरू हुई, गाँव में पोलियो अभियान चला, पंचायत चुनाव में बच्चों ने कैसे प्रचार किया या साहस के लिए किसी बच्चे को पुरस्कार मिला.

या फिर कहाँ बिजली की समस्या की वजह से बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते.

महाराष्ट्र, राजस्थान, केरल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में बच्चे इस अख़बार के पाठक हैं जो नियमित रूप से चिट्ठियाँ भी भेजते हैं.

अख़बार में स्वेच्छा से योगदान करने वाले बच्चे इसकी लोकप्रियता पर ख़ासा गौरव महसूस करते हैं.

लोकप्रियता

सातवीं कक्षा का विनय सप्ताह में दो दिन यहाँ आकर ख़बरों का चुनाव करता है.

वह बताता है, "मुझे यहाँ आकर बहुत अच्छा लगता है. जब नागपुर और भोपाल के बच्चों की खबरें मिलती हैं तब हमें पता चलता है कि वहाँ के बच्चे भी हमारी ही तरह हैं."

बच्चों का अख़बार
बच्चों का अख़बार बच्चों के बीच ख़ासा लोकप्रिय हो रहा है

बच्चों का यह अख़बार हाथ से लिखा जाता है, फिर इसे छपाई के लिए भेज दिया जाता है और ये काम देखती हैं इसकी संपादक सुधा.

उन्होंने भागीदारी को आधार बनाकर अख़बार निकालने का बीड़ा उठाया है.

उनका कहना है, "जब हम सशक्तिकरण की बात करते हैं तो ये बचपन से ही शुरू होना चाहिए. इस अख़बार से बच्चे जुड़े हुए हैं और वे इससे अपनी शख़्सियत का जुड़ाव महसूस करते हैं."

सुधा कहती हैं, "दैनिक समाचार पत्र बच्चों के नाम पर कविता-कहानी ही छापते हैं. जबकि यह अख़बार आज के समय को बच्चों के नज़रिए से देखने की कोशिश है."

आख़िर बच्चों के अख़बार में ऐसा क्या ख़ास है जो इतनी दिलचस्पी जगा रहा है.

दस साल के मनीष ने ये अख़बार अपने दोस्त के यहाँ देखा था, "ये अख़बार पढ़कर अच्छा लगा. इसमें बच्चों की बातें होती हैं बड़ों की बातें नहीं होतीं."

ये अख़बार साप्ताहिक है और इसकी चार हज़ार से ज़्यादा प्रतियां निकाली जाती हैं.

बच्चों की सहभागिता से और बच्चों के लिए ही निकल रहे इस अख़बार ने बाल रचनात्मकता को नए आयाम देने की कोशिश की है .

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