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पाकिस्तान के ख़िलाफ़ साज़िश: मिर्ज़ा बेग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख मिर्ज़ा असलम बेग ने आरोप लगाया है कि परमाणु सूचनाएँ लीक करने को लेकर चल रहा विवाद अमरीका और ब्रिटेन की साज़िश का परिणाम है. बीबीसी उर्दू सेवा के फ़ोन-इन कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए बेग ने कहा कि परमाणु सूचनाओं के प्रसार से जुड़ी जो भी बातें सामने आई हैं, सबकी जानकारी अमरीका और ब्रिटेन को पहले से थी. उन्होंने कहा, "जब उन्हें पहले से मालूम था तो पहले क्यों नहीं बताया?" बेग ने कहा कि अब जो कुछ भी हो रहा है उसका मक़सद पाकिस्तान और उसके वैज्ञानिकों को ज़लील करना है. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के इस आरोप को ग़लत बताया कि उन्हें पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी जाती थी. बेग ने कहा, "दरअसल 1976 से 1992 तक काहूटा रिसर्च लैबोरेटरी के साइंसदान सदर और वज़ीरे आज़म से ही मुख़ातिब होते थे. फ़ौज की कोई भूमिका नहीं थी." बेनज़ीर के बयान को 'सियासी बयान' बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हीं के प्रधानमंत्री रहने के दौरान यूरेनियम संवर्द्धन का प्रतिशत 95 से घटा कर पाँच किया गया था. 'दबाव नहीं बढ़ेगा' कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति फ़ारुक़ लेघारी और सांसद एवं पूर्व सूचना मंत्री मुशाहिद हुसैन ने भी भाग लिया. हुसैन ने इस बात से इनकार किया कि ताज़ा घटनाक्रम को देखते हुए पाकिस्तान पर अमरीका का दबाव बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप चलाया जाता तो शायद पाकिस्तान एटमी ताक़त बन ही नहीं पाता. लेघारी ने कहा कि क़दीर ख़ान को स्वायत्तता मिली हुई थी और इसलिए उन्होंने जब परमाणु सूचनाएँ लीक करने का फ़ैसला किया तो कोई उन पर रोक लगा नहीं पाया. हालाँकि उन्होंने कहा कि ख़ुफ़िया एजेंसियों को इसका पता होना चाहिए था. |
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