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'तालेबान की वापसी हो सकती है'
अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका के सहायता कार्यों के समन्वय पर नज़र रखने वाले विलियम टेलर ने चेतावनी दी है कि अगर दान देने वालों ने सहायता कार्य नहीं बढ़ाए तो तालेबान की वापसी हो सकती है. लंदन पहुँचने पर बीबीसी से विशेष बातचीत में टेलर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफ़ग़ानिस्तान के बारे में लंबे समय की प्रतिबद्धता दिखानी होगी. अफ़ग़ानिस्तान को दिए जा रहे धन के बारे में मार्च महीने की शुरुआत में ही एक सम्मेलन होना है और अमरीका पूरी कोशिश में है कि यूरोपीय देशों की सरकारों की ओर से उसे कुछ और मदद का वायदा मिले. हाल ही में अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान के लिए अपनी मदद दोगुनी कर दी है. मगर यूरोपीय देश अभी मदद देने के बारे में खुलकर कोई बात नहीं कह रहे हैं. लंदन में ब्रितानी अधिकारियों से मिलने के बाद उन्होंने उम्मीद जताई कि अन्य दाता देश भी और मदद के साथ आगे आएँगे.
तालेबान को उखाड़ फेंकने के बाद वर्ष 2002 में तोक्यो में दाता देशों की जो बैठक हुई थी उसमें अफ़ग़ानिस्तान के लिए साढ़े चार अरब डॉलर के मदद की पेशकश की गई थी मगर अफ़ग़ान सरकार इसे बढ़ाना चाहती है. अमरीका की एक ग़ैर सरकारी संस्था 'केयर' और न्यूयॉर्क के 'सेंटर ऑन इंटरनेशनल कोऑपरेशन' ने हाल ही में एक अध्ययन किया और उससे ये बात सामने आई कि अब तक अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण की ज़रूरतों में से सिर्फ़ एक प्रतिशत ही पूरा हुआ है. इधर अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के दूत रहे लखदर ब्राहिमी ने भी हाल में कहा था कि दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में सहायता कार्य सुरक्षित ढंग से जारी रखने के लिए कम से पाँच से दस हज़ार और सैनिकों की ज़रूरत है. |
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