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रविवार, 04 जनवरी, 2004 को 00:15 GMT तक के समाचार
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'लोया जिरगा' समाप्ति की ओर पर मतभेद बरक़रार
लोया जिरगा में प्रतिनिधि
संविधान के मसौदे पर मतभेद बने हुए हैं

अफ़ग़ानिस्तान में क़बायली सरदारों की परंपरागत महासभा लोया जिरगा की बैठक का रविवार को अंतिम दिन है लेकिन नए संविधान को लेकर अब तक सहमति नहीं हो पाई है.

संविधान के मसौदे पर तीन सप्ताह चली बहस का कोई नतीजा नहीं निकल पाया है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि आधिकारिक भाषा और मंत्रियों की दोहरी नागरिकता का सवाल उलझा हुआ है.

लोया जिरगा की अध्यक्षता कर रहे सिबग़तुल्ला मुजादेदी का कहना है कि मसौदे के विभिन्न अनुच्छेदों में से केवल एक शब्द पर फ़ैसला नहीं हो पाया है. उन्होंने इसके बारे में और जानकारी नहीं दी.

ख़बर है कि ये शब्द है- 'उज़्बेक'.

 यदि संविधान को रविवार को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका तो हमें दुनिया को बताना पड़ेगा कि हम असफल रहे

लोया जिरगा के अध्यक्ष

कुछ प्रतिनिधियों ने उज़्बेक भाषा को पश्तो के अलावा आधिकारिक भाषा बनाने का विरोध किया है.

अफ़ग़ानिस्तान में पश्तून वहाँ की राजनीति पर हावी रहे हैं और उनकी ताजिक, उज़्बेक और हज़ारा जातियों से पुरानी प्रतिद्वंद्विता रही है.

लोया जिरगा के अध्यक्ष का कहना था,"यदि संविधान को रविवार को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका तो हमें दुनिया को बताना पड़ेगा कि हम असफल रहे."

बीबीसी संवाददाता के अनुसार लोया जिरगा को गुरुवार को स्थगित कर देना पड़ा था क्योंकि 502 प्रतिनिधियों में से 235 ने संशोधित संविधान पर मतदान से इनकार कर दिया था.

संयुक्त राष्ट्र के अफ़ग़ानिस्तान के लिए विशेष दूत लख़दर ब्राहिमी ने भी शुक्रवार को मतभेद दूर करने के प्रयास किए.

लोया जिरगा में एक ओर तो सरकार के समर्थक प्रतिनिधि हैं तो दूसरी ओर छोटे-छोटे जातीय गुटों का प्रतिनिधत्व करने वाले मुजाहिदीन नेता हैं.

क्या है लोया जिरगा?

यह अफ़ग़ानिस्तान की एक अनूठी संस्था है जिसमें तमाम क़बायली समूहों के नेता एक साथ बैठते हैं.

इसकी बैठक में देश के मामलों पर विचार-विमर्श कर फ़ैसले किए जाते हैं.

लोया जिरगा पश्तो भाषा का शब्द है और इनका मतलब है महापरिषद.

सैकड़ों साल पुरानी यह संस्था इस्लामी शूरा या सलाहकार परिषद जैसे सिद्धांत पर ही काम करती है.

अब तक क़बीलों के आपसी झगड़े सुलझाने, सामाजिक सुधारों पर विचार करने और नए संविधान को मंज़ूरी देने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है.

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