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लोया जिरगा अंतिम चरण में
अफ़ग़ानिस्तान में नया संविधान तैयार करने के लिए एक पखवाड़ा पहले बुलाई गई लोया जिरगा यानी महापरिषद अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है लेकिन मतभेद बरक़रार हैं. लोया जिरगा के क़रीब पाँच सौ सदस्य देश की भावी शासन व्यवस्था पर अब भी एकमत नहीं हो पाए हैं. उम्मीद की जा रही है कि लोया जिरगा संविधान के मसौदे पर अगले एक दो दिनों में मतदान कर देगी लेकिन संभावना व्यक्त की जा रही है कि इसमें फ़ैसला बहुमत से ही होगा और कोई आम राय नहीं बन पाएगी. लोया जिरगा में मौजूद बीबीसी संवाददाता ज़फ़र अब्बास का कहना है कि नए संविधान के बारे में मतभेद इसका मसौदा मंज़ूरी के लिए पेश किए जाने के थोड़ी देर बाद ही उभरने शुरू हो गए थे. ज़्यादातार मतभेद इस बात को लेकर थे कि संविधान का मसौदा किस तरह जाँचा परखा जाए. यहाँ तक कि कुछ प्रतिनिधियों ने मसौदे में कुछ बदलाव किए जाने के तरीक़े पर भी ऐतराज किया. उन्होंने माँग की कि पहले उन्हें संविधान के मसौदे की प्रतियाँ मुहैया कराई जाएं और फिर तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुली बहस कराई जाए. बहस लोया जिरगा के चेयरमैन सिबग़तुल्ला मोजद्ददी ने हालाँकि प्रतिनिधियों को समझाने-बुझाने की काफ़ी कोशिश की लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली.
अब मसौदे पर बहस को सोमवार के लिए टाल दिया गया. सोमवार को पहले सभी पाँच सौ सदस्यों को मसौदे की प्रतियाँ मुहैया कराई जाएंगी जिसके बाद बहस शुरू होगी. कुछ प्रतिनिधियों का कहना है कि पचास सदस्यों वाली सांत्वना समिति की कोशिशों के बावजूद कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बरक़रार रहेंगे. एक गुट देश की मौजूदा राष्ट्रपति प्रणाली वाली सरकार का विरोध कर रहा है जबकि पूर्व मुजाहिदीन नेता इस्लामी व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए कुछ ठोस प्रावधानों की माँग कर रहे हैं. विभिन्न भाषाओं को मान्यता और कुछ छोटे जातीय अल्पसंख्यकों के अधिकारों के मुद्दों पर भी मतभेद क़ायम हैं लेकिन आयोजकों को अभी भी भरोसा है कि लोया जिरगा मंगलवार तक संविधान के मसौदे को अपनी मंज़ूरी दे देगी. |
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