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लोया जिरगा की कार्यवाही में हंगामा
अफ़ग़ानिस्तान में कबायली सरदारों की परंपरागत महासभा लोया जिरगा में एक महिला सदस्य के बयान के बाद हंगामा मच गया और कार्यवाही में बाधा पड़ी है. लोया जिरगा में एक महिला प्रतिनिधि मलाली जोया ने कहा कि 1980 के दौरान सोवियत संघ के ख़िलाफ़ लड़ने वाले मुजाहिदीन ही हाल के वर्षों में अफ़ग़ानिस्तान के ख़राब माहौल के लिए ज़िम्मेदार हैं. महिला प्रतिनिधि ने माँग थी कि इन लोगों के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय अदालत में मामला चलाया जाना चाहिए. कई प्रतिनिधियों ने उनके इस बयान पर तालियाँ बजाईं. लेकिन कई प्रतिनिधियों ने नाराज़गी से 'कम्युनिस्टों को मौत' जैसे नारे लगाए. इस नारेबाज़ी पर तभी काब़ू पाया जा सका जब एक बड़े मुजाहदीन नेता अब्दुल रब सयाफ़ ने शांति की अपील की. देश के संविधान की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए यह बैठक हो रही है. संविधान पर विचार के लिए 500 से ज़्यादा प्रतिनिधि जुटे हैं. इनमें सौ महिलाएँ शामिल हैं. प्रतिनिधि 1967 के संविधान की जगह लागू किए जाने वाले नए संविधान में केंद्र-राज्य शक्ति संतुलन पर विचार कर रहे हैं. क्या है लोया जिरगा? यह अफ़ग़ानिस्तान की एक अनूठी संस्था है जिसमें तमाम कबायली समूहों के नेता एक साथ बैठते हैं. इसकी बैठक में देश के मामलों पर विचार विमर्श कर फ़ैसले किए जाते हैं. लोया जिरगा पश्तो भाषा का शब्द है और इनका मतलब है महापरिषद. सैकड़ों साल पुरानी यह संस्था इस्लामी शूरा या सलाहकार परिषद जैसे सिद्धांत पर ही काम करती है. अब तक कबीलों के आपसी झगड़े सुलझाने, सामाजिक सुधारों पर विचार करने और नए संविधान को मंज़ूरी देने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है. |
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