|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामी गणतंत्र का प्रस्ताव
अफ़ग़ानिस्तान के लिए संविधान का एक मसविदा पेश किया गया है जिसमें एक नई राजनीतिक व्यवस्था और देश मे इस्लाम की भूमिका की व्याख्या की गई है. इसमें कहा गया है कि देश में एक इस्लामी गणतंत्र की स्थापना हो, राष्ट्रपति की व्यवस्था हो और नागरिकों के समान अधिकार हों. इस मसविदे पर अगले महीने लोया जिरगा में बहस होगी और 2004 में संभावित चुनावों का भी रास्ता साफ़ होगा. राष्ट्रपति हामिद करज़ई के एक प्रवक्ता ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता की ज़रूरत है और नए संविधान को अगले सौ-दो सौ सालों को ध्यान में रख कर बनाया गया है.
यह समारोह ऐसे समय हुआ जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल देश में घूम कर लड़ाई के बाद के पुनर्निर्माण के काम का जायज़ा ले रहा है. वर्ष 2001 में तालेबान के हटने के बाद अफ़ग़ानिस्तान आने वाला इस तरह का यह पहला प्रतिनिधिमंडल है. संविधान समिति को यह मसविदा सितंबर में पेश करना था लेकिन इसमें तकनीकी कारणों से देर हुई. यह मसविदा राष्ट्रपति निवास में एक औपचारिक समारोह में पेश किया गया जिसमें हामिद करज़ई, पूर्व शासक ज़ाहिर शाह और विदेशी राजनयिक मौजूद थे. अट्ठासी वर्षीय पूर्व शासक ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह संविधान लोगों को शांति, सुरक्षा और लोकतंत्र की राह पर ले जाएगा. काबुल में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि नए संविधान के तहत देश को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान कहा जाएगा. अफ़ग़ानवासियों के समान अधिकार होंगे और महिलाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||