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बुश ने नए संविधान का स्वागत किया
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान और अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने अफ़ग़ानिस्तान में परंपरागत महासभा लोया जिरगा के देश के नए संविधान स्वीकार करने का स्वागत किया है. कोफ़ी अन्नान ने कहा कि ये 'ऐतिहासिक उपलब्धि' है जबकि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इसे अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के हित में बताया. लगभग तीन हफ़्ते तक चली गर्मागर्म बहस के बाद पाँच सौ सदस्यों ने खड़े होकर इस संविधान के प्रति सहमति जताई. बैठक के अध्यक्ष सिबग़ातुल्ला मुजद्ददी ने काबुल में रविवार को कहा, "हम खुश हैं कि लोया जिरगा की बैठक सफल रही है." उन्होंने प्रतिनिधियों के साथ-साथ अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के मिशन को इसके लिए धन्यवाद कहा.
मुजद्ददी ने कहा है कि शाम को संविधान का प्रारूप प्रतिनिधियों के बीच हस्ताक्षर के लिए वितरित किया जाएगा. उन्होंने ये नहीं बताया कि कई दिनों से चला रहा गतिरोध कैसे समाप्त हुआ. इस नए संविधान के बाद राष्ट्रपति को काफ़ी अधिकार मिल जाएँगे और वर्तमान राष्ट्रपति हामिद करज़ई भी ऐसा ही चाहते थे. इसके अलावा देश की संसद में महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व मिल जाएगा. वैसे बीबीसी के काबुल संवाददाता का कहना है कि लोया जिरगा ने एक बार फिर अफ़गानिस्तान में विभिन्न समुदायों के मतभेद उजागर किए हैं. उल्लेखनीय है कि लोया जिरगा में नए संविधान के दो महत्वपूर्ण विषयों- आधिकारिक भाषा और दोहरी नागरिकता- पर विवाद था. मुजद्ददी ने इससे पहले चेतावनी दी थी कि यदि प्रतिनिधि आम सहमति बनाने में रविवार तक सफल नहीं हो पाए तो दुनिया को बैठक की नाकामी की बात पता चल जाएगी. उज़्बेक भाषा को पश्तो और दरी के साथ आधिकारिक भाषा का दर्ज़ा दिए जाने के मामले में काफ़ी बहस हुई. लोया जिरगा अफ़ग़ानिस्तान की एक अनूठी संस्था है जिसमें तमाम क़बायली समूहों के नेता एक साथ बैठते हैं. सैकड़ों साल पुरानी यह संस्था इस्लामी शूरा या सलाहकार परिषद जैसे सिद्धांत पर ही काम करती है. |
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