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कुमारतुंगा के प्रस्ताव पर सहमति नहीं
श्रीलंका में जारी राजनीतिक संकट दूर करने के लिए दिए गए राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा के सत्ता में भागीदारी के प्रस्ताव को प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने ठुकरा दिया है. प्रधानमंत्री के क़रीबी अधिकारियों का कहना है कि इससे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान का कोई हल नहीं निकलेगा. राष्ट्रपति कुमारतुंगा ने अपने प्रस्ताव में रक्षा मंत्रालय में भागीदारी का प्रस्ताव रखा था. उल्लेखनीय है कि इस माह के शुरु में राष्ट्रपति ने देश की सुरक्षा का हवाला देते हुए रक्षा मंत्री सहित तीन मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया था और उसका प्रभार ख़ुद संभाल लिया था. दरअसल दोनों नेताओं के बीच तमिल विद्रोहियों के साथ चल रही शांति वार्ता को लेकर असहमति है. प्रस्ताव सात पृष्ठों के इस प्रस्ताव की प्रतियाँ शुक्रवार को राष्ट्रपति निवास से 'लीक' की गईं थीं. अब राष्ट्रपति कुमारतुंगा ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि प्रधानमंत्री रक्षा मंत्रालय में अपना प्रतिनिधि नियुक्त कर दें जो तमिल विद्रोहियों यानी एलटीटीई के साथ बातचीत का प्रभारी बना दिया जाएगा. बीबीसी संवाददाता फ़्रांसिस हैरिसन का कहना है कि इसका मतलब साफ़ है कि रक्षा मंत्रालय वे अपने हाथ में ही रखने वाली हैं. इस प्रस्ताव पर तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि यह अमल में लाने योग्य नहीं है. तमिल विद्रोही पहले ही यह चिंता जता चुके हैं कि इस राजनीतिक संकट के चलते शांति वार्ता खटाई में पड़ सकती है. उधर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे नॉर्वे ने फ़िलहाल मध्यस्थ की भूमिका छोड़ देने का फ़ैसला पहले ही कर लिया है. |
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