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नॉर्वे ने श्रीलंका में हाथ खड़े किए
श्रीलंका की शांति वार्ता में मध्यस्थता कर रहे नॉर्वे के वार्ताकारों ने कहा है कि शांति प्रक्रिया तब तक स्थगित रहेगी जब तक देश की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा और प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के बीच सत्ता संघर्ष समाप्त नहीं हो जाता. नॉर्वे के विदेश उपमंत्री विदार हेलगेसेन ने कहा कि अब मध्यस्थ इसमें इससे ज़्यादा कुछ नहीं कर सकते. उन्होंने चेतावनी भी दी कि स्थिति से काफ़ी चिंताएँ पैदा हो रही हैं. हेलगेसेन ने कहा, "हम इंतज़ार करने के लिए वापस जा रहे हैं. वर्तमान राजनीतिक स्थिति में तो बातचीत करना असंभव ही होगा." श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच फ़रवरी 2002 में हुए संघर्ष विराम में नॉर्वे के मध्यस्थों की प्रमुख भूमिका थी. इस तरह नॉर्वे इस शांति वार्ता में अहम भूमिका निभाता आ रहा है. मगर इस साल अप्रैल से ही ये शांति वार्ता स्थगित है क्योंकि तमिल विद्रोही और अंतरिम स्वायत्तता की माँग कर रहे हैं. नॉर्वे के मध्यस्थ इसी सप्ताह देश में इस उम्मीद के साथ आए थे कि वे नए दौर की बातचीत की शुरुआत कर सकेंगे. मगर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच एक तरह का सत्ता संघर्ष छिड़ा हुआ है जिसमें प्रधानमंत्री विद्रोहियों के साथ दीर्घकालिक शांति चाह रहे हैं जबकि राष्ट्रपति का आरोप है कि प्रधानमंत्री तमिल विद्रोहियों को काफ़ी छूट दे रहे हैं. राष्ट्रपति कुमारतुंगा ने रक्षा, गृह और सूचना विभाग प्रधानमंत्री से वापस ले लिए हैं और इस तरह विवाद ने और तूल पकड़ लिया है. |
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