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अपनी छोड़कर बाक़ी सीटों पर सट्टा

विजयाराजे सिंधिया
विजयाराजे सिंधिया भाजपा की मुख्यमंत्री पद की दावेदार हैं

पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर ज़िले का फ़लोदी कस्बा अपने सट्टा बाज़ार के लिए जाना जाता है.

यहाँ आपको हर पाँच घरों में से तीन घरो के लोग सट्टा लगाते मिलेंगे.

क़रीब एक लाख की आबादी वाले इस कस्बे में सट्टेबाज़ी का केंद्र है गांधी चौक.

यहाँ लोग आपस में इशारा करते या किसी कोड में बात करते मिल जाएँगे.

केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बनते-बिगड़ते समीकरण से लेकर क्रिकेट और बारिश तक पर यहाँ दांव लगता है.

जहाँ तक पैसे की बात है आप पाँच पैसे से लेकर लाखों रुपए तक का सट्टा लगा सकते हैं.

पुराना कारोबार

स्थानीय लोगों का कहना है कि फ़लोदी में यह कारोबार पीढ़ी दर पीढ़ी चला रहा है.

 1975 में इंदिरा गांधी पर पाँच पैसे का सट्टा लगा था और राजनारायण पर 100 रुपए का सट्टा लगा था

महेश कुमार

इस बाज़ार में 1975 में लगी इमरजेंसी से हुए राजनीतिक परिवर्तनों पर भी सट्टा लगा था.

एक स्थानीय व्यक्ति महेश कुमार बताते हैं कि उस समय इंदिरा गांधी पर पाँच पैसे का सट्टा लगा था और राजनारायण पर 100 रुपए का सट्टा लगा था.

लेकिन मज़े की बात ये है कि दुनिया जहान पर सट्टा लगाने वाले इस कस्बे में ख़ुद अपनी विधानसभा सीट पर सट्टा नहीं लगाया जाता.

कारण 1993 में हुए विधानसभा चुनाव, जिनमें स्थानीय उम्मीदवार पुष्पा संगानी हार गई थीं.

स्थानीय लोगों को चुनाव के इस नतीजे से बहुत ठेस पहुँची थी.

 अगर स्थानीय प्रत्याशी पर सट्टा लगाते हैं तो हार-जीत पर असर पड़ता है और हम इस बार किसी बाहर के प्रत्याशी को नहीं आने देंगे

ओमप्रकाश

इसलिए इस बार यहाँ के लोगों ने एकमत होकर फ़लोंदी की सीट पर सट्टा नही लगाने का फ़ैसला किया है.

तीस-वर्षीय ओमप्रकाश का कहना है कि अगर स्थानीय प्रत्याशी पर सट्टा लगाते हैं तो हार-जीत पर असर पड़ता है और वो इस बार किसी बाहर के प्रत्याशी को नहीं आने देंगे.

फ़लोदी के सट्टा बाज़ार में किसका कितना भाव होगा ये मुंबई और बीकानेर के सट्टेबाज़ तय करते हैं.

दावा

वैसे सट्टेबाज़ी क़ानूनी जुर्म है लेकिन सट्टेबाज़ों का मानना है कि उनका पूरा धंधा ईमानदारी पर होता है.

उनके अनुसार इस खेल में ज़ुबान की क़ीमत होती है और इसमें कोई लिखा पढ़ी भी नहीं होती.

राजस्थान के सट्टा बाज़ार में राजनेता और उनकी पार्टियों पर पैसा लगाने वाले सट्टेबाज़ों का धंधा उनकी राजनीति के गणित की जानकारी पर टिका है और वो अपने अनुमानों को किसी सर्वे के अनुमानों से कही ज़्यादा सटीक मानते हैं.

राजनीति की सट्टेबाज़ी में चुनाव नतीजों के आते-आते करोड़ों रुपए इधर से उधर हो जाते हैं.

फ़लोदी में अनुमान के मुताबिक अब तक करोड़ों रुपए का सट्टा लग चुका है.

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