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नॉर्वे के पीछे हटने से एलटीटीई चिंतित
श्रीलंका में शांति प्रक्रिया से मध्यस्थ नार्वे के हट जाने पर तमिल विद्रोहियों के संगठन लिबरेशन टाईगर्स ऑफ़ तमिल ईलम यानी एलटीटीई ने चिंता जताई है. एलटीटीई के प्रवक्ता दया मास्टर ने कहा है कि संगठन इसलिए चिंतित है क्योंकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि शांति वार्ता फिर कब शुरु होगी. उल्लेखनीय है कि गुरुवार को शांति प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे नार्वे ने हटने की घोषणा कर दी थी. नार्वे का कहना है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच चल रहा संकट पहले दूर होना चाहिए. वहाँ राजनीतिक गतिरोध पैदा होने के बाद से यह चिंता व्यक्त की जा रही है कि इसका शांति प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है. सरकार और एलटीटीई के बीच शांति प्रक्रिया में नार्वे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. शांति प्रक्रिया को लेकर ही राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के बीच जो खींचतान शुरु हुई थी वही एक राजनीतिक संकट में तब्दील हो चुकी है. राष्ट्रपति कुमारतुंगा ने तीन मंत्रियों को बर्खास्त कर संसद को निलंबित कर दिया है. हालांकि राष्ट्रपति और एलटीटीई दोनों ने कहा था कि शांति प्रक्रिया जारी रहेगी. कोलंबो में बीबीसी संवाददाता फ़्रांसिस हैरिसन का कहना है कि इस बीच एलटीटीई ने राजनीतिक संकट पर चुप्पी साध रखी है लेकिन उन्हें भी इस बात का अहसास है कि राजनीतिक संकट के समाधान के बिना शांति वार्ता आगे नहीं बढ़ सकती. शांति प्रक्रिया के रुक जाने से अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मिलने वाले 4.5 अरब डॉलर की मदद भी खटाई में पड़ती दिख रही है. |
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