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शनिवार, 18 अक्तूबर, 2003 को 09:31 GMT तक के समाचार
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मंदिर आंदोलन के बारे में अयोध्या के लोगों की राय

अयोध्या में आम लोग
आम लोगों का राम मंदिर और आंदोलन से कम ही लेना देना है

दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद से जब भी राम मंदिर बनाने के आंदोलन में तेज़ी आती है तो सबसे ज़्यादा असर अयोध्या के जनजीवन पर पड़ता है.

अयोध्यावासी मानते हैं कि यह असर नकारात्मक ही ज़्यादा होता है.

ज़्यादातर लोग मानते हैं कि अयोध्या का मामला एक राजनीतिक मामला है और इसका लाभ राजनीति करने वालों को ही मिल रहा है.

हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास का कहना है कि राम मंदिर के निर्माण का मुद्दा अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उससे जुड़े संगठनों के लिए सिर्फ़ चुनावी या सत्ता हथियाने का मुद्दा बनकर रह गया है.

उनका कहना है, ''अब भगवान राम की भूमिका सिर्फ़ एक पोलिंग एजेंट के रुप में रह गई है.''

अयोध्या में समय-समय पर होने वाले आंदोलनों का असर कामधंधे पर कितना पड़ा है इस सवाल पर लोग कहते हैं कि उन्हें नुक़सान ही होता है.

किराना व्यापारी मुश्ताक़ अहमद कहते हैं कि जब से राम मंदिर का आंदोलन शुरु हुआ है तब से धंधा कम से कम 25 प्रतिशत घट गया है.

पेट का सवाल

लोग कहते हैं कि कामधंधे के सामने धर्म और जाति का सवाल ही खड़ा नहीं होता.

 अब भगवान राम की भूमिका सिर्फ़ एक पोलिंग एजेंट के रुप में रह गई है

महंत ज्ञानदास

उनका कहना है कि बाहर से आने वाले लोग या राजनीति करने वाले लोग यहाँ के माहौल को दूषित करने की कोशिश करते हैं और उसका असर ग़रीब जनता पर पड़ता है.

उनकी इस बात का समर्थन करते हुए सोमेश तिवारी कहते हैं, ''जब पेट पालने का सवाल आता है तो जाति और धर्म का सवाल कोई नहीं पूछता.''

सोमेश कहते हैं कि वे ख़ुद हिंदू ब्राह्मण हैं और वे टेम्पो चलाते हैं जिसके मालिक अब्दुल रज़्ज़ाक हैं.

मेडिकल रिप्रज़ेंटेटिव आरएम शर्मा का कहना है कि मंदिर मस्जिद मसले से अयोध्यावासियों का कोई जुड़ाव नहीं है.

वे कहते हैं कि आए दिन राजनीतिक जो खेल करते हैं उसका असर उन मजदूरों पर होता है जो हर रोज़ मजदूरी करके अपना पेट पालते हैं.

भाईचारा

यह सिर्फ़ पेट से जुड़ा सवाल नहीं है, यूँ भी अयोध्या में लोग मिलजुलकर रहते हैं और राम मंदिर के लंबे आदोलन के बाद भी भाईचारा बरकरार है.

 जब पेट पालने का सवाल आता है तो जाति और धर्म का सवाल कोई नहीं पूछता

सोमेश तिवारी

इस मंदिर के पुजारी स्वरुपानंद बताते हैं कि अरघरा के ज़्यादातर निवासी मुसलमान हैं और इस मंदिर के ठीक सामने ऐतिहासिक औरंगज़ेब मस्जिद है.

मंदिर में रोज़ आरती होती है लेकिन यह ध्यान में रखकर की आरती के समय में और अजान-नमाज़ के समय में कोई टकराव न हो.

लईक़ अख़्तर फ़ैज़ाबादी अयोध्या के बुज़ुर्गों में से हैं.

वे कहते हैं कि यहाँ भाईचारा कोई अभी नहीं पनपा है, यहाँ हिंदू और मुसलमान एक दूसरे का त्योहार मनाते आए हैं.

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