पाकिस्तानी संगीत को मिला नया जीवन

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- Author, हफ़ीज़ चाचड़
- पदनाम, बीबीसी हिंदी संवाददाता, इस्लामाबाद
पाकिस्तान में इन दिनों कोक स्टूडियो की काफी चर्चा है और उसने क्षेत्रीय और लोक संगीत को नया जीवन दिया है.
कोक स्टूडियो टेलीविज़न पर चलने वाला एक लाइव म्यूज़िक शो है और पाकिस्तान में इसकी शुरुआत वर्ष 2008 को हुई थी और अब तक इसके चार सीजन हो चुके हैं.
यह शो ‘कोका कोला कंपनी’ के सहयोग से पेश किया जाता है और इस शो में संगीत की अलग अलग विधाओं से जुड़े गायक मंच पर एक साथ गाते हैं, वहीं इसकी बिना किसी काट छांट के साथ अंतिम रिकॉर्डिंग भी होती है.
पाकिस्तान में यह म्यूजिक शो काफी लोकप्रिय है और इसकी खास बात यह है कि इसने पाकिस्तान के ऐसे सूफी, शास्त्रीय और लोक गायकों को मंच पर पहुँचाया है, जिनको ज्यादा लोग नहीं जानते थे.
इस स्टूडियो में पाकिस्तान के बड़े गायक अपने फन का प्रदर्शन कर चुके हैं, जिसमें आबिदा परवीन, राहत फतेह अली खान, टीना सानी और अन्य शामिल हैं.
कोक स्टूडियो पेश करने का श्रेय संगीतकार रोहैल हयात को जाता है जो इस शो के निर्माता भी हैं.
वह कहते हैं कि पाकिस्तान का लोक संगीत बहुत अच्छा है और देश के ग्रामीण इलाक़ों में ऐसे ऐसे गायक मौजूद हैं, जिनको आज तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा मंच नहीं मिला है.
'लोक और पॉप का संगम'
उनका कहना था कि उन्होंने सिंध, पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वाह के लोक गायकों को कोक स्टूडियो के मंच पर बुलाया और साथ में नए पाकिस्तान के नए पॉप गायकों खड़ा कर दिया, जिन्होंने साथ प्रदर्शन कर नए संगीत को जन्म दिया.
वे कहते हैं, “यह कोक स्टूडियो की खूबसूरती है और इसी के कारण इसको बहुत ज्यादा सफलता मिली है. सूफी गायक साईं जहूर बहुत पंसद किए गए और पंजाब के लोक गायक अताऊल्लाह खान ने भी कमाल कर दिया.”
रोहैल का कहना है कि ‘बलूचिस्तान का संगीत बहुत कमाल है लेकिन पाकिस्तान के अधिकतर लोगों को बलोची भाषा समझ नहीं आता है, इसलिए कोक स्टूडियो में बलोची और उर्दू भाषा में मिक्स कर गाया गया.’
वे कहते हैं कि कोक स्टूडियो ने इस क्षेत्र के शास्त्रीय संगीत पर भी बहुत ज्यादा ध्यान दिया और ऐसे गायकों को मंच पर गाने के अवसर मिला, जो काफी मशहूर हुए.
साईं जहूर पाकिस्तान के बहुत बड़े सूफी गायक हैं और वे अपने ही स्टाइल में गाना गाते हैं. कोक स्टूडियो में उनके सूफी संगीत को पॉप का तड़का लगाया गया और सबसे ज्यादा मशहूर साबित हुआ.
साईं जहूर ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, “मैं जो कोक स्टूडियो में काम किया वह काफी अच्छा लगा. मैं लिख पढ़ नहीं सकता हूँ लेकिन वहाँ मैंने अंग्रेजी भाषा में भी गाना गाया.”
'आवाज दब गई'
उन्होंने कहा कि कोक स्टूडियो में उन्हें गाते हुए अच्छा जरूर लगा लेकिन संगीत के आधुनिक उपकरणों की वजह से उनकी आवाज दब सी गई.

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वे कहते हैं कि उन्होंने अपने बेटे को भी संगीत की शिक्षा देनी शुरु कर दी है और वह चाहते हैं कि भविष्य में उनको अंतरराष्ट्रीय स्तर का मंच मिले.
कोक स्टूडियो ने सिंधी भाषा की गायिका सनम मारवी को तलाश किया और मंच पर उन्होंने ऐसा जादू चलाया और वही उनकी लोकप्रियता का कारण बना.
उन्होंने कोक स्टूडियो में राजस्थान की भाषा मारवाड़ी में गाना गया कर लोगों की काफी प्रशंसा लूटी.
वे कहती हैं, "मेरे बाबा बहुत अच्छे गायक हैं और बचपन में उनको रियाज करते देखा तो गाना का शौक पैदा हुआ. सात साल की उम्र से गाना शुरू किया और अभी कर गा रही हूँ. कोक स्टूडियो से काफी फायदा हुआ है."
उन्होंने बताया कि उन्होंने कोक स्टूडियो में मारवाड़ी भाषा का ऐसा गीत गया है जो आम तौर पर दक्षिणी सिंध के गावों में तो गाया जाता है लेकिन ज्यादातर लोगों को पता नहीं है.
कोक स्टूडियो ने बलूचिस्तान के मशहूर गायक अख्तर चनाल को भी मंच पर बुलाया और उन्होंने पाकिस्तान की मशहूर पॉप गायिका कोमल रिजवी के साथ अपना मशहूर गाना गया और ये काफी लोकप्रिय भी हुआ.
इसी तरह कोक स्टूडियो ने सिंधी, बलोची, पंजाबी और पश्तो के लोक गायकों सहित कई सूफी गायकों को भी दुनिया से परिचय कराया है और पाकिस्तानी संगीत को नई दिशा दी है.












