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शनिवार, 14 फ़रवरी, 2009 को 23:09 GMT तक के समाचार
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'मुक्त व्यापार पर नियंत्रण भारी पड़ेगा'
जी7
बैठक में कहा गया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने के प्रयासों को बल दिया जाए
इटली में जी-7 देशों के बैठक में जिस एक बात को लेकर सबसे ज़्यादा प्रतिबद्धता दिखाई गई है, वो है दुनिया में मुक्त व्यापार को नियंत्रित करने की कोशिशों का विरोध.

जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों की इस अहम बैठक में कहा गया कि देश आर्थिक मंदी के कारण किसी तरह के संरक्षणवादी प्रयासों से बचें.

यानी निर्यात की ही बात सोचने और अपनी सीमाओं के भीतर आयात को रोकने की कोशिशों से देशों को बचना चाहिए.

जी-7 के सदस्य देशों की ओर से इससे बचने की प्रतिबद्धता भी दिखाई गई और कहा गया कि अगर मुक्त व्यापार को रोकने या बाधा पहुँचाने की कोशिश की गईं तो हालात और ख़राब हो जाएंगे.

इसे इस तरह समझा जा सकता है कि अगर दुनियाभर में देश यह सोचने लगें कि उनका तो सामान बिके और विदेशी मुद्रा आए पर उनके यहाँ दूसरों का सामान आयात न हो तो इससे व्यापार और मुद्रा विनिमय बुरी तरह प्रभावित होंगे.

नतीजा यह होगा कि बाज़ार की हालत और ख़राब होगी, अर्थव्यवस्थाओं पर और ज़्यादा प्रतिकूल असर पड़ेगा.

जी-7 यानी अमरीका, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी, फ्रांस, इटली और कनाडा. इन देशों के वित्त मंत्री और आर्थिक मामलों के बड़े अधिकारी इटली में वैश्विक आर्थिक मंदी की स्थिति पर बातचीत करने के लिए इकट्ठा हुए थे.

अमरीकी रवैये पर चिंता

ग़ौरतलब है कि जहाँ एक ओर इन सदस्य देशों ने पुरज़ोर कहा कि मुक्त व्यापार के प्रति संरक्षणवादी रवैया आर्थिक संकट को और बदतर करेगा वहीं इससे ठीक पहले अमरीकी संसद ने एक आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज को पारित किया है जो संरक्षणवाद से प्रेरित है.

787 अरब अमरीकी डॉलर के इस प्रोत्साहन पैकेज में अमरीका के उत्पादों को तरजीह देने पर बल दिया गया है.

इस क़दम को जानकार संरक्षणवादी क़दम मान रहे हैं और उनका तर्क है कि इसे और देशों ने भी अपनाया तो संकट और गहरा जाएगा.

इसी के मद्देनज़र अपील भी यही की गई है कि इस कठिन दौर में मुक्त व्यापार को प्रभावित न होने दिया जाए.

वहीं बैठक में यह भी फ़ैसला लिया गया कि ताज़ा दौर में वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता देना और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को संभालना ज़रूरी है.

इसी कड़ी में लंदन में अप्रैल महीने के दौरान एक और बैठक का आयोजन भी तय किया गया है. इस जी-20 बैठक में भारत और चीन भी हिस्सा लेंगे.

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