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अल-क़ायदा नेता अल-मसारी की 'मौत' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी ख़ुफ़िया सूत्रों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में हमलों के लिए ज़िम्मेदार प्रमुख अल-क़ायदा चरमपंथी नेता अबू ओबैदा अल-मसारी की मौत हो गई है. सूत्रों का कहना है कि ब्रिटेन और अन्य जगहों पर हमलों में मुख्य भूमिका निभाने वाले मसारी की मौत प्राकृतिक वजहों से हुई. एक अमरीकी अधिकारी ने बीबीसी से कहा, ऐसा लगता है कि मसारी की मृत्यु पिछले दो महीनों में शायद हेपेटाईटिस से हुई. मसारी मिस्र में पैदा हुए थे. आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाइयों में शामिल अमरीकी और ब्रितानी अधिकारी मसारी को अल-क़ायदा की विदेशों में कार्रवाइयाँ करने वाले गुट का प्रमुख बताते रहे हैं. गावों में हमले बीबीसी के रक्षा संवाददाता फ्रैंक गार्डनर कहते हैं, माना जाता रहा है कि 2001 में तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर खदेड़े जाने के बाद अमरीकी नेतृत्व वाली सेना पर हुए हमलों में मसारी की मुख्य भूमिका रही. उसके बाद मसारी ने अपना ध्यान पश्चिमी जनता पर ज़ोरदार हमले करने पर केंद्रित किया. मसारी अफ़ग़ानिस्तान में कार्यरत पूर्व सैनिक कमांडर थे. माना जा रहा है मृत्यु से पहले मसारी पाकिस्तान के आदिवासी इलाकों में छुपे हुए थे. आतंकवाद के विरुद्ध कार्यवाहियों में शामिल अधिकारियों का मानना है मसारी अल-का़यदा के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे, इतने ज्यादा महत्वपूर्ण कि संगठन ने अभी तक मसारी का उत्तराधिकारी नियुक्त नहीं किया है. मसारी इतने रहस्यमय व्यक्ति थे कि उनके नाम को भी बेहद गुप्त रखा गया था – अबू ओबैदा अल-मसारी उनका झूठा नाम था. य़े एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है मिस्र के रहने वाले ओबैदा के पिता. विस्फोट विशेषज्ञ मसारी के ऊपर पहले दो जानलेवा हमले हो चुके थे, लेकिन उनकी क़िस्मत ने दोनों ही बार उनका साथ दिया और वो बच गए. साल 2006 में पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा था कि अफ़ग़ान सीमा के पास एक पाकिस्तानी गाँव में हुए मिसाइल हमले में उनकी मौत हो गई है, हालांकि बाद में स्थिति साफ़ करते हुए उन्होंने बताया था कि मसारी उस वक्त गाँव में नहीं थे. साल 2006 में एक पाकिस्तानी गाँव में हुए एक और मिसाइल हमले में वो निशाना चूकने की वजह से बच गए. लंदन स्थित एक स्वतंत्र ख़ुफ़िया विचार मंच, एशिया पैसिफ़िक फाउंडेशन, के आतंकवाद विशेषज्ञ एमजे गोहेल कहते हैं कि मसारी एक जाने-माने विस्फोट विशेषज्ञ थे. रॉयटर्स समाचार एजेंसी से बात करते हुए गोहेल ने कहा कि आतंकवाद की जड़ों की बात करें तो राह पाकिस्तान की तरफ़ जाती है, और मसारी पाकिस्तान स्थित अल-कायदा मुख्यालय में एक अहम भूमिका निभा रहे थे. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरीका ने रिज़र्व मरीन सैनिक बुलाए23 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना बुश-मुशर्रफ़-करज़ई की अहम बैठक27 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना ब्लेयर का सैनिकों को मदद का भरोसा07 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना पश्चिम के साथ तनाव नहीं: करज़ई07 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना नैटो सम्मेलन: अफ़ग़ान रणनीति पर चर्चा03 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना नैटो अफ़ग़ानिस्तान में सहायता बढ़ाएगा03 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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