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इराक़ में पाँच अमरीकी सैनिकों की मौत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में अमरीकी सेना ने कहा है कि बग़दाद में हुए एक आत्मघाती हमले में उसके पाँच सैनिकों की मौत हो गई है. हमले के समय सैनिक गश्त लगा रहे थे. इराक़ी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल क़ासिम अता ने एएफ़पी को बताया, "एक चरमपंथी विस्फोटकों से लैस था और उसने सैनिकों के पास आकर ख़ुद को उड़ा दिया." अमरीकी सेना ने बीबीसी को बताया कि हमला मंसूर ज़िले में हुआ. सेना के बयान के मुताबिक तीन अन्य सैनिक और एक इराक़ी दुभाषिया भी घायल हुए हैं. सुरक्षा इंतज़ाम पुख़्ता करने के लिए पिछले साल अमरीका ने बग़दाद में सैनिकों की संख्या काफ़ी बढ़ा दी थी. उसके बाद से बग़दाद में अमरीकी सेना पर ये सबसे बड़ा हमला है. हिंसा में कमी बीबीसी संवाददाता के मुताबिक वर्ष 2003 में इराक़ पर अमरीकी हमले के बाद से अब तक करीब चार हज़ार अमरीकी सैनिक मारे जा चुके हैं. इराक़ पर अमरीकी हमले के पाँच साल पूरे होने जा रहे हैं. इसे देखते हुए बग़दाद के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. पिछले साल से अमरीका के सैनिकों पर हमलों में कमी आई है. सेना पर हुए इस हमले से कुछ घंटे पहले ही एक सुन्नी नेता थायेर ग़दबन अल-कारखी पर बग़दाद में ही आत्मघाती हमला किया गया था जिसमें उनकी मौत हो गई. साथ ही उनकी बेटी और दो गार्ड भी मारे गए.हमला करने वाली एक महिला था. थायेर ग़दबन अल-कारखी सुन्नी अरब एवेकनिंग काउंसिल के सदस्य थे जो इराक़ में अल क़ायदा के ख़िलाफ़ अमरीकी सेना के साथ थी. सुन्नी मीलिशिया के बारे में कहा जाता रहा है कि उन्होंने इराक़ में चरमपंथी हिंसा कम करने में मदद की है. . | इससे जुड़ी ख़बरें शिया श्रद्धालुओं पर हमला, 40 की मौत24 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना 'केमिकल अली' की सज़ा-ए-मौत मंज़ूर29 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना इराक़ में तुर्की सेना की मौजूदगी पर चिंता28 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना इराक़ी शरणार्थियों को लौटाने पर विचार16 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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