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मैक्केन जीते, हिलेरी फिर दौड़ में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़ुटबॉल की एक बहुत पुरानी कहावत है. मैदान पर गिरना कोई मायने नहीं रखता, मायने ये रखता है कि आप गिरकर कितनी जल्दी उठ खड़े होते हैं. और व्हाइट हाउस के टिकट की रेस में चार मार्च को याद रखा जाएगा दो उम्मीदवारों की गिरकर उठने की कहानी के लिए. आठ साल पहले जो उम्मीदवार जॉर्ज डब्ल्यू बुश के हाथों उम्मीदवारी की रेस हार गया था, चार महीने पहले जिसे मीडिया ने मुक़ाबले से पहले ही हारा हुआ मान लिया था वही जॉन मैक्केन 2008 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार बन गए हैं. लेकिन 'मैक इज़ बैक' से भी बड़ी वापसी की है डेमोक्रेटिक पार्टी की टिकट की रेस में उस उम्मीदवार ने जिसे यहाँ के अख़बारों और टीवी चैनलों ने मैच के हाफ़ टाइम से भी पहले ही बाहर कर दिया था. रोज़ लंबे लंबे लेख लिखे जा रहे थे कि उन्हें ख़ुद ही अपना नाम वापस ले लेना चाहिए और उसी हिलेरी क्लिंटन ने चार में से तीन राज्यों में बराक ओबामा के ख़िलाफ़ जीत हासिल करके इस रेस को फिर से वहां ला दिया है जहां से ये रेस शुरू हुई थी. इतिहास कुछ लोगों का कहना हैं कि पिछले सौ साल में ऐसा नहीं हुआ कि कोई ओहायो हार गया हो और फिर भी राष्ट्रपति चुन लिया गया हो और हिलेरी क्लिंटन ने ओहायो में जीत के बाद अमरीका को यही बात याद दिलाने की कोशिश की. ओहायो, टेक्सस और रोड आइलैंड उनके खाते में गए और वरमोंट पर बराक ओबामा ने क़ब्ज़ा किया.
टेक्सस के सैन ऐंटोनियो शहर में दुनिया के कोने कोने से मीडिया जुटी थी इस उम्मीद के साथ कि शायद चार मार्च को बराक ओबामा अपनी उम्मीदवारी को पूरी तरह से पुख़्ता कर लेंगे. लोगों को उम्मीद थी कि जो भाषण देंगे वो प्राइमरी चुनाव में जीत के लिए नहीं बल्कि नवंबर में होने वाले चुनाव अभियान की शुरूआत के लिए होगा. भाषण उन्होंने दिया भी, रिपबलिकन पार्टी के उम्मीदवार जॉन मैकेन पर निशाना भी लगाया लेकिन कहीं न कहीं लगातार बारह जीत के बात मिली रफ़्तार में अचानक से ब्रेक लग जाने का एक एहसास भी नज़र आया. बराक ओबामा के कल के इस भाषण में शायद उनके पहले के भाषणों की शायद झलक भर थी लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी के वोटरों में उत्साह की कोई कमी नहीं दिखी. चाहे हिलैरी के समर्थक हों या ओबामा के, कंपकंपाती ठंड हो, भारी बारिश हो या फिर सुनहरी धूप लोग भारी तादाद में बाहर निकले और वोट किया. कुछ ओबामा की राजनीति और उनकी उम्मीद भरी बातों पर न्योछावार हैं तो कुछ हिलेरी के अनुभव में अपनी सुरक्षा तलाश कर रहे हैं. लेकिन दोनों ही का उत्साह डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए अच्छी ख़बर है.
बुरी ख़बर ये है कि ये रेस अब चलती ही जाएगी. मिसिसिपी, वायोमिंग, पेंसिलवेनिया हर जगह मुक़ाबला काँटे का होगा क्योंकि अभी भी दोनों उम्मीदवारों के बीच डेलिगेट्स, यानी हर राज्य के प्रतिनिधि जो आख़िर में इन्हें चुनेंगे, उनकी संख्या में उन्नीस-बीस का ही फ़र्क है. हिलेरी क्लिंटन अब कहेंगी कि बड़े बड़े राज्य जहाँ नवंबर के चुनाव में जीत हासिल करना ज़रूरी होगा वहाँ उन्होंने ओबामा को हराया है इसलिए उम्मीदवारी की सही हक़दार वही हैं. जबकि बराक ओबामा कहेंगे कि उनके पास डेलिगेट्स की तादाद ज़्यादा है, उनकी वजह से युवा मतदाता भारी तादाद में बाहर आ रहे हैं इसलिए पार्टी के भविष्य के लिए वो बेहतर हैं. और एक दूसरे पर हमले में भी तेज़ी आएगी. और ताली बजाएगी रिपबलिकन पार्टी, क्योंकि उसे बैठे बिठाए इन दोनों में से जो भी चुना जाए उसके ख़िलाफ़ नवंबर की जंग के लिए असला बारूद मिलता जाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव: सुपर ट्यूसडे05 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना ओबामा-हिलेरी में काँटे की टक्कर06 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना काँटे की है टक्कर का एशियाई पहलू06 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना उम्मीदवारों की नज़र अगले प्रांत पर04 जनवरी, 2008 | पहला पन्ना ओबामा-हिलेरी के बीच आरोप-प्रत्यारोप27 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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