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चींटियों की एकजुटता... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चींटियों के बारे में यह कहा जाता है कि वो बड़े संगठित रूप से बस्तियों में रहती हैं. कहीं जाती हैं तो एक साथ जाती हैं लेकिन वो सीधी क़तार में कैसे चल पाती हैं. यह जानना चाहते हैं बभंगवा, आज़मगढ़ उत्तर प्रदेश से प्रवीन राय. यह चमत्कार होता है फ़ैरोमोंस से. चींटियों में कुछ ग्रंथियाँ होती हैं जिनसे फ़ैरोमोंस नामक रसायन निकलते हैं. इन्हीं के ज़रिए वो एक दूसरे के संपर्क में रहती हैं. चींटियों के दो स्पर्शश्रंगिकाएं या ऐंटिना होते हैं जिनसे वो सूंघने का काम करती हैं. रानी चींटी भोजन की तलाश में निकलती है तो फ़ैरोमोंस छोड़ती जाती है. दूसरी चीटियाँ अपने ऐंटिना से उसे सूंघती हुई रानी चींटी के पीछे-पीछे चली जाती हैं. जब रानी चींटी एक ख़ास फ़ैरोमोन बनाना बंद कर देती है तो चीटियाँ, नई चींटी को रानी चुन लेती हैं. फ़ैरोमोंस का प्रयोग और बहुत सी स्थितियों में होता है. जैसे अगर कोई चींटी कुचल जाए तो चेतावनी के फ़ैरोमोन का रिसाव करती है जिससे बाक़ी चींटियाँ हमले के लिए तैयार हो जाती हैं. फ़ैरोमोंस से यह भी पता चलता है कि कौन सी चींटी किस कार्यदल का हिस्सा है. शारजाह, संयुक्त अरब अमीरात से राकेश संखला यह जानना चाहते हैं कि टिनाइटिस बीमारी क्या है और उसका क्या इलाज है. टिनाइटिस कोई बीमारी नहीं बल्कि एक लक्षण है. इसमें कान में झंझनाहट या आवाज़ आती है जबकि आस पास कोई आवाज़ नहीं होती. इसके कई कारण हो सकते हैं. कई बार दवाओं के प्रयोग से जैसे ऐस्पिरिन, रक्तचाप की दवाओं या ऐंटीबॉयटिक दवाओं के सेवन से भी ऐसा हो सकता है. इसके अलावा वृद्धावस्था में जब कम सुनाई देने लगता है तब भी टिनाइटिस हो सकता है. कभी-कभी बहुत समय तक तीव्र ध्वनि सुनते रहने से भी यह लक्षण पैदा हो जाते हैं. इसका इलाज इसके कारणों पर निर्भर करता है. अगर दवाओं के सेवन से यह पैदा हुआ है तो उन दवाओं का प्रयोग बंद करना लाभकारी रहता है. अगर कम सुनाई देने की वजह से यह लक्षण उभरा है तो यह सुझाव दिया जाता है कि वो कोई बाहरी ध्वनि पैदा करें जैसे पंखा चला लें या रेडियो चला लें. लेकिन अगर इन उपायों से लाभ न हो तो विस्तृत जांच की जाती है और इलाज किया जाता है. सबसे ऊँचाई पर उड़ने वाला पक्षी कौन सा है. यह सवाल लिख भेजा है सासाराम बिहार से मोहम्मद आसिफ़ ख़ान ने.
सबसे ऊँचाई पर उड़ने का रेकार्ड जिप्स रूपैली जाति के एक गिद्ध का है जिसकी लंबाई पंख फैलाने पर दस फ़ुट की हो जाती है. ऐसा ही एक गिद्ध 29 नवंबर 1975 को पश्चिमी अफ़्रीकी देश आइवरी कोस्ट के ऊपर 37900 फ़िट की ऊँचाई पर उड़ रहे जैट विमान के इंजन ने खींच लिया जिससे विमान को क्षति पहुँची और उसे उतरना पडा. लेकिन नियमित रूप से सबसे ऊँचाई पर उड़ने वाला पक्षी है ऐंसर इंडिकस जाति का हंस जिसे ऐवरेस्ट के ऊपर भी उड़ता देखा जा सकता है. सवाल ये उठता है कि इतनी ऊँचाई पर तो ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम हो जाती है फिर ये पक्षी कैसे इतना ऊँचा उड़ लेते हैं. इन हंसो को प्रकृति की कुछ ऐसी देन है कि जब ये सांस लेते हैं तो भीतर गई हवा दो बार फेफड़ों में घूमती है. वो इसलिए क्योंकि इनमें एक विशेष प्रकार का हीमोग्लोबिन होता है जो ऊंचाइयों पर बड़ी जल्दी ऑक्सीजन को जज़्ब कर लेता है और यह ऑक्सीजन मांसपेशियों तक पहुंच जाती है जिससे उड़ने में इन्हें आसानी होती है. आनंदमार्गी पंथ क्या है. यह सवाल किया है ग्राम नईटांड जमुआ गिरिडीह झारखंड के सुरेश प्रसाद बर्मा ने. आनंदमार्ग एक आध्यात्मिक संगठन है जिसकी स्थापना 1955 में प्रभात रंजन सरकार ने की थी जिन्हें श्री श्री आनंदमूर्ति कहा जाता है. आनंद मार्ग अपना उद्देश्य बताता है - आत्मोद्धार, मानवता की सेवा और सबकी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति. आनंदमार्ग के दुनिया भर में चिंतन केंद्र हैं जहाँ चिंतन, योग और आत्मविकास सिखाया जाता है. हर व्यक्ति ख़ुश रहना चाहता है लेकिन कोई भी चीज़ स्थाई ख़ुशी नहीं देती. तो हम स्थाई ख़ुशी कैसे पा सकते हैं.... अपने बोध को अनंतता तक बढ़ाकर, अपने सीमित अनुभव को असीमित ब्रह्मांडीय अनुभव में बदल कर. आनंद मार्ग का दावा है कि यह ऐसा करना सिखाता है. ऐसी तकनीक और अभ्यास जिससे असीमित आनंद और शांति का अनुभव हो सके. राम सेतु क्या है. क्या यह प्राकृतिक सेतु है या रामायण में वर्णित नल नील द्वारा बनाया सेतु है. इसपर विवाद क्यों चल रहा है. पूछते हैं ग्राम अम्बियापुर, बदायूं उत्तर प्रदेश से प्रदीप कुमार मौर्य और ग्राम मुरार, बक्सर बिहार के मणिकांत तिवारी.
भारत के दक्षिण पूर्वी सिरे रामेश्वरम और श्रीलंका के पश्चिमोत्तर मन्नार द्वीपों के बीच चूना पत्थर की एक लड़ी सी है जिसे ऐडम्स ब्रिज या रामसेतु कहा जाता है. हिंदुओं का विश्वास है कि भगवान राम ने सीता जी को रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए इस सेतु का निर्माण कराया था. वाल्मीकि रामायण में इसे सेतु बंधनम कहा गया है. कुछ लोग इसे मानव निर्मित मानते हैं जबकि कुछ इसे प्राकृतिक कहते हैं. दोनों ही पक्षों के अपने अपने तर्क हैं. तीस मील लंबे इस सेतु के आसपास समुद्र इतना उथला है कि इसमें जहाज़ नहीं चल सकते. भारत सरकार की सेतु समुद्रम परियोजना इसे गहरा खोदने की है जिससे पानी के जहाज़ इसमें से होकर गुज़र सकें और उन्हें श्रीलंका का चक्कर लगाकर न जाना पड़े. विवाद इसी बात पर है. उर्दू का सबसे पहला अख़बार कौन सा था. यह सवाल किया है श्याम श्रीवास्तव ने. भारत का पहला उर्दू अख़बार था जाम-ए-जहाँ नुमां जो 27 मार्च 1822 को कलकत्ता से निकलना शुरू हुआ. उन दिनों अख़बार साप्ताहिक या पाक्षिक हुआ करते थे, दैनिक नहीं. पहला दैनिक 1858 में मौलवी कबीरुद्दीन ने कलकत्ता में शुरू किया था. बुढ़ान बीघा औरंगाबाद बिहार के मणिकांत सिंह ग्लूमी संडे नामक गीत के बारे विस्तार से जानना चाहते हैं. ग्लूमी संडे या उदास रविवार एक गीत है जिसे 1933 में हंगरी में जन्मे एक संगीतकार रैज़्सो सेरैस ने लिखा था. किम्वदंती है कि इस गीत ने सैकड़ों लोगों को आत्महत्या करने को प्रेरित किया और जल्दी ही यह आत्महत्या गीत के रूप में चर्चित होने लगा. फिर सैम ऐम लुइस और जैसमंड कार्टर ने इसका अंग्रेज़ी अनुवाद तैयार किया. इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई लेकिन आत्महत्या इसके साथ जुड़ी रही. दुनिया के कई प्रसारकों ने इसके प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया था. लेकिन यह गीत बहुतों ने गाया और रेकार्ड किया है. |
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