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श्रीलंका में 'पत्रकारों के लिए ख़तरा बढ़ा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि श्रीलंका में पत्रकारों के लिए काम करने का ख़तरा बहुत बढ़ गया है. संस्था का कहना है कि चूंकि श्रीलंका एक बार फिर से गृहयुद्ध की चपेट में आ गया है इसलिए वहाँ अभिव्यक्ति की आज़ादी का ख़तरा बढ़ गया है. संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले दो साल में 10 मीडिया कर्मियों की मौत हुई है. कुछ और का अपहरण कर लिया गया है, बंधक बना लिया गया है या वे लापता हो गए हैं. जिन्हें निशाना बनाया गया उनमें वो पत्रकार रहे हैं जो उत्तर और पूर्वी श्रीलंका के संघर्ष वाले इलाक़े में काम कर रहे हैं. एमनेस्टी का कहना है कि दक्षिणी श्रीलंका में पत्रकारों को धमकियाँ मिली हैं, ख़ासकर उनको जो भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ रिपोर्ट कर रहे थे. संस्था का कहना है कि वहाँ ऐसा माहौल बन गया है कि दोषी लोगों को सज़ा भी नहीं मिल रही है. अंतरराष्ट्रीय संस्था ने कहा है कि उत्तर और पूर्वी हिस्सों में काम कर रहे तमिल पत्रकारों को ख़तरा सेना और उन हथियारबंद तमिल गुटों से बढ़ा है जो सेना के इशारे पर काम कर रहे हैं. एमनेस्टी का कहना है कि तमिल विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाक़ों से उनके ख़िलाफ़ दी जाने वाली ख़बरों को पूरी तरह से रोक दिया जाता है. एमनेस्टी ने श्रीलंका सरकार से कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का सम्मान करे. संस्था ने सरकार और तमिल विद्रोहियों दोनों से अपील की है कि वे पत्रकारों पर हमला बंद करें. | इससे जुड़ी ख़बरें कोलंबो स्टेशन पर धमाका, 11 की मौत03 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में ताज़ा संघर्ष, नौ मारे गए18 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'तमिल विद्रोहियों का शिविर ध्वस्त'17 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में तमिल सांसद की हत्या01 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंकाई सैनिकों पर 'दुराचार' का मामला03 नवंबर, 2007 | पहला पन्ना असफल राष्ट्रों में पाकिस्तान ऊपर01 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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