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तारों का राज़ क्या है... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तारों का जन्म कैसे होता है. यह जानना चाहते हैं ग्राम फुलकाहा बाज़ार नवाबगंज अररिया बिहार से विकाश कुमार गुप्ता. आकाश गंगाएँ गैस और धूल के बादलों से भरी हुई हैं. इन बादलों का अधिकांश भाग हाइड्रोजन गैस, 23 से 28 प्रतिशत हीलियम गैस और कुछ प्रतिशत भारी तत्वों से भरा होता है. यही बादल तारों का जन्म स्थान है. होता ये है कि जब कभी किसी बड़े तारे का पूरा ईंधन चुक जाने से विस्फोट होता है या फिर दो आकाश गंगाएँ टकराती हैं तो उससे आवेशित कणों की तरंगे पैदा होती हैं जो इन बादलों के भीतर अस्थिरता पैदा करती हैं. इन बादलों में जब घनत्व बढ़ता है तो वह अपने ही गुरुत्वाकर्षण बल से ढहने लगता है. इसमें एक से डेढ़ करोड़ वर्ष लगते हैं. जैसे जैसे घनत्व बढ़ता जाता है गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा गर्मी में बदलती जाती है और इस तरह तारे का जन्म होता है. क्या तारों की अपनी रोशनी होती है?. यह सवाल लिख भेजा है सुपौल बिहार से अंदलीब इमरोज़ ने. तारे जलती हुई गैस के गोले होते हैं जिनके केंद्र में आण्विक संलयन चलता रहता है क्योंकि तारे हज़ारों डिग्री तापमान पर जलते हैं वे रोशनी तो पैदा करेंगे ही. दरभंगा बिहार से अनिल कुमार झा ने सवाल लिख भेजा है कि गोत्र क्या होता है. हिंदू धर्म और वर्णाश्रम व्यवस्था में गोत्र वंश या कुल के पहले व्यक्ति के नाम पर आधारित होता है. प्राय यह पिता के वंश के आधार पर निर्धारित होता है और आमतौर पर गोत्र किसी न किसी वैदिक ऋषि के नाम से जाना जाता है. यह धारणा है कि वेदों में वर्णित अनेक ऋषियों में से सात के नामों से वंशानुगत गोत्र को पहले मान्यता दी गई है लेकिन बाद में लोग अपने पूर्वजों में से किसी प्रसिद्ध व्यक्ति या ऋषि के नाम से भी गोत्र मानने लगे. यही कारण है कि हिंदू धर्म ग्रन्थों में हर किसी पात्र या व्यक्ति को गोत्र के नाम से भी पुकारा जाता है. आमतौर पर गोत्र पुरुषों के नाम से जुड़ा होता है इसलिए आज जितने भी गोत्र होंगे उनका नाम पुरुष ऋषि मुनियों या महापुरुषों के आधार पर मिलेगा. जैसे जैसे समय बीतता गया लोग अपने अपने गोत्र अपनी वंशानुगत परंपरा के आधार पर अपनाते गए इसलिए गोत्रों की संख्या भी बढ़ती गई. बाड़मेर राजस्थान से गोपाल एस सोलंकी, वॉरंट और समन में अंतर जानना चाहते हैं. मेरी समझ से गोपाल जी, आप गिरफ़्तारी वॉरंट की बात कर रहे हैं. गिरफ़्तारी वॉरंट अदालत द्वारा जारी किया गया दस्तावेज़ है, जिसमें पुलिस को उस व्यक्ति को गिरफ़्तार करने का आदेश दिया जाता है जिसपर किसी अपराध का संदेह है. जबकि समन्स अदालत द्वारा जारी किया गया वह दस्तावेज़ है जिसमें प्रतिवादी को उसके ख़िलाफ़ दायर आरोपों का जवाब देने के लिए एक निश्चित दिन और समय पर अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया जाता है. पटना से जयंती सी झा लिखती हैं कि इंदिरा गांधी ने तो फ़िरोज़ ख़ान से शादी की थी तो वो गांधी कैसे हुईं.
जयंती जी इंदिरा गांधी ने फ़िरोज़ गांधी से शादी की थी जिनका जन्म एक पारसी परिवार में हुआ था. वो स्वतंत्र भारत की पहली संसद के सदस्य थे और नेशनल हैरल्ड अख़बार के संपादक भी रहे. ग्राम बरौनी बेगूसराय बिहार से राजेश कुमार चौरसिया पूछते हैं कि सूर्य की रोशनी में गर्मी होती है जबकि चंद्रमा की रोशनी में गर्मी नहीं होती. ऐसा क्यों. उसका कारण ये है राजेश जी कि चंद्रमा की रोशनी का स्रोत स्वयं चंद्रमा नहीं बल्कि सूर्य है. चंद्रमा की सतह नन्हें-नन्हें शीशेनुमाँ कणों से ढकी है जो परावर्तकों का काम करते हैं. सूर्य की रोशनी चंद्रमा पर पड़ती है और परावर्तित होकर पृथ्वी तक पहुँचती है. इसीलिए उसमें गर्मी नहीं होती. दुदूली, नैनीताल उत्तरांचल से राजू शर्मा पूछते हैं कि भारत में श्वेत क्रांति और हरित क्रांति के जनक कौन थे. वर्गीज़ कुरियन को भारत की श्वेत क्रांति का जनक माना जाता है. उन्होंने गुजरात के आनंद शहर में सहकारी डेरी विकास के एक मॉडल की स्थापना की और भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना दिया. उन्होंने अमूल जैसे ब्रैंड स्थापित किए जिन्हें भारत का बच्चा-बच्चा जानता है. जहाँ तक हरित क्रांति का सवाल है उसके जनक थे सी सुब्रमण्यम. 1943 में बंगाल में ज़बरदस्त अकाल पडा जिसमें कोई चालीस लाख लोग मारे गए थे. आज़ादी के बाद खाद्यान्न के उत्पादन पर काफ़ी ज़ोर दिया गया लेकिन उतनी सफलता नहीं मिली. फिर सत्तर के दशक में जब सी सुब्रमण्यम खाद्य और कृषि मंत्री बने तो उन्होंने हरित क्रांति की योजना तैयार की जिसमें खेतिहर भूमि का विस्तार, एक साल में दो फ़सलें उगाना और बेहतर बीज आयात करना और तैयार करना शामिल था. जिसका नतीजा ये हुआ कि दशक के अंत तक खाद्यान्न के उत्पादन में 30 प्रतिशत वृद्धि हो गई. |
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