BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 21 नवंबर, 2007 को 11:28 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
एचआईवी पीड़ितों की संख्या अनुमान से कम
फ़ाइल फ़ोटो
एशिया में एडस पीड़ितों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है
संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2007 में एचआईवी पीड़ितों की संख्या के जो नए आँकड़े जारी किए है उनके अनुसार यह संख्या पहले के अनुमान के मुताबिक चार करोड़ नहीं बल्कि तीन करोड़ 30 लाख है.

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में एचआईवी पीड़ितों की संशोधित संख्या के मद्देनज़र संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों में यह कमी आई है.

एचआईवी के नए मामलों या एड्स से मरने वालो की संख्या में कमी आई है लेकिन आँकड़े बताते हैं कि वर्तमान में प्रति दिन छह हज़ार आठ सौ नए मामले एचआईवी पीड़ितों के सामने आते हैं और पाँच हज़ार सात सौ से ज़्यादा लोगों की एड्स से मौत होती है.

 सुधार के बाद एचआईवी पीड़ितों के जो आँकड़े मिले हैं उससे इस महामारी की साफ़ तस्वीर हमारे सामने आई है. यह हमारे लिए चुनौती भी है और अवसर भी. निस्संदेह हमें निवेश का फल मिल रहा है
संयुक्त राष्ट्र के एड्स कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक, डॉ पीटर प्योट

एचआईवी से पीड़ितों की संख्या सबसे ज़्यादा अफ्रीका में है जबकि एशिया के कुछ हिस्सों में एचआईवी पीड़ितों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है.

क़रीब 22 करोड़ 50 लाख एचआईवी के मरीज़ अफ्रीका के सब-सहारा क्षेत्र में हैं लेकिन एचआईवी पीड़ितों के नए मामलों में प्रति वर्ष एक करोड़ 70 लाख की वृद्धि पिछले वर्षों की तुलना में काफ़ी कम हैं.

'साफ़ तस्वीर'

संयुक्त राष्ट्र के एड्स कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर पीटर प्योट ने कहा, " सुधार के बाद एचआईवी पीड़ितों के जो आँकड़े मिले हैं उससे इस महामारी की साफ़ तस्वीर हमारे सामने आई है. यह हमारे लिए चुनौती भी है और अवसर भी. निस्संदेह हमें निवेश का फल मिल रहा है."

साथ ही उन्होंने कहा, "हमें अपनी क्षमताओं को बढ़ाना होगा ताकि हम पूरी दुनिया से एचआईवी और एड्स के प्रभाव को कम कर सके."

आँकड़ों के मुताबिक़ वर्ष 2007 में दो करोड़ 50 लाख नए मामले सामने आए हैं जबकि 1990 के दशक के आख़िरी वर्षों में प्रति वर्ष तीन करोड़ से भी ज़्यादा एचआईवी/एड्स पीड़ितों के नए मामले सामने आते थे.

‘एंटी रेट्रो वायरल’ दवाओं के ज़रिए इलाज की सुलभता से एचआईवी/एड्स पीड़ितों की मृत्यु दर में कमी आई है.

ग़ौरतलब है कि वर्ष 2006 में गहन पड़ताल के बाद भारत में पहले जो ज्ञात आँकड़े थे उससे कम पीड़ित पाए गए. संयुक्त राष्ट्र के एड्स कार्यक्रम के मुताबिक़ इससे 2006 के आँकड़े ग़लत हो सकते हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2006 में एड्स पीड़ितों की सही संख्या तक़रीबन 32 करोड़ 70 लाख रही होगी.

अमरीका के जॉन्स हॉपकिंस ब्लूबर्ग स्कूल ऑव पब्लिक हेल्थ में लोक स्वास्थ्य के विशेषज्ञ प्रोफेसर ब्रूकमेयर का मानना है कि एचआईवी से लड़ने में सही आँकड़े कारगर साबित होंगे.

उन्होंने कहा, "ज़्यादा सही आँकड़े और प्रवृत्ति की जानकारी होने से अंततः बचाव कार्यक्रमों की रूप-रेखा बनाने और मूल्यांकन करने में सुधार होगा."

इससे जुड़ी ख़बरें
एड्स से लड़ने के लिए पैसे कम
26 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना
एड्सरोधी दवाएँ बाँटी जाएंगी
08 अगस्त, 2003 | पहला पन्ना
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>