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सऊदी अरब में बड़े क़ानूनी सुधार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सऊदी अरब ने अपनी न्यायिक प्रणाली में व्यापक सुधार करने का ऐलान किया है और इस सुधार के तहत जजों को प्रशिक्षण और नई अदालतें बनाना भी शामिल होगा. शाही फ़रमान से शुरू होने वाले इस सुधार कार्यक्रम के लिए लगभग दो अरब डॉलर की राशि आबंटित की गई है. इस सुधार कार्यक्रम के तहत एक सुप्रीम कोर्ट भी बनाया जाएगा. इसके अलावा एक अपील अदालत बनेगी और कुछ नई अदालतें भी बनाई जाएंगी. ये सभी मिलकर सुप्रीम न्यायिक परिषद का स्थान लेंगी. सुधारवादियों ने इस क़दम का स्वागत किया है और उनका कहना है कि इससे मानवाधिकार के हालात बेहत बनाने और देश का आधुनिकीकरण करने में मदद मिलेगी. सुधारवादियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सऊदी अरब की मौजूदा न्यायिक व्यवस्था मनमाने तरीके से चलती है. अभी तक ऐसा होता रहा है कि सऊदी अरब के जजों को इस्लामी शरिया क़ानून की व्याख्या करके ख़ुद की मर्ज़ी के अनुसार ही निर्णय सुनाने का अधिकार रहा है. मौजूदा न्यायिक व्यवस्था ने नए क़ानून बनाए जाने का भी विराध करती रही है. इसके अलावा अभियुक्तों को अपील का भी अधिकार नहीं होता है और अक्सर मामलों में उन्हें क़ानूनी प्रतिनिधित्व यानी वकीलों की सहायता भी नहीं मिलती है. निरंकुश शक्तियाँ बीबीसी संवाददाता हेबा सालेह का कहना है कि नए सुधारों का ऐलान शाह अब्दुल्ला ने किया है और इसका उद्देश्य मौजूदा ख़ामियों को दूर करना है. साथ ही अपील अदालतें स्थापित करना है जो निचली अदालतों के फ़ैसलों पर सुनवाई कर सकेंगी और उनमें निचली अदालतों के फ़ैसलों को पलटना भी शामिल होगा.
सऊदी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हसन अल मुल्ला ने बताया है कि इस शाही फ़रमान के तहत दो सुप्रीम कोर्ट बनाए जाएंगे जिनमें से एक आम मामलों की अदालतों के लिए होगा और दूसरा प्रशासनिक अदालतों के लिए. ये सुप्रीम कोर्ट मौजूदा सुप्रीम जूडिशियल काउंसिल का स्थान लेंगे जिसके बाद काउंसिल को जजों के वेतन-भत्तों और नियुक्तियों जैसे प्रशासनिक मामलों की समीक्षा करने का अधिकार रह जाएगा. हसन अल मुल्ला ने बताया कि इस शाही फ़रमान के तहत व्यावसायिक, श्रम और कार्मिक मामलों के लिए विशिष्ठ अदालतें भी बनाई जाएंगी. अभी तक मंत्रालयों के ट्राइब्यूनल ही श्रम से संबंधित विवादों की सुनवाई और फ़ैसले करते थे और उनमें अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त अपील की व्यवस्था नहीं होती थी. सऊदी अरब में सुधारवादियों का कहना है कि इन सुधारों से परंपरागत मुल्ला-मौलवियों के निरंकुश अधिकारों पर काफ़ी अंकुश लगेगा जो मौजूदा प्रणाली में न्यायिक व्यवस्था पर हावी हैं. हालाँकि नई क़ानूनी व्यवस्था का केंद्र भी इस्लामी क़ानून ही रहेंगे, फिर भी सुधारवादियों का कहना है कि फिर भी मानवाधिकार और कारोबार के हालात को काफ़ी हद तक फ़ायदा होगा. सुप्रीम कोर्ट के मुखिया की नियुक्ति शाह अब्दुल्ला करेंगे. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सुधारवादियों के अनुसार चूँकि शाह अब्दुल्ला ख़ुद ही क़ानूनी व्यवस्था में सुधार करने के इच्छुक हैं इसलिए ऐसी संभावना है कि वे किसी ऐसे व्यक्ति को इस पद के लिए चुनेंगे जो सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें शांति प्रक्रिया का समर्थक है सऊदी अरब01 अगस्त, 2007 | पहला पन्ना सऊदी अरब के राजकुमार को 'दलाली'07 जून, 2007 | पहला पन्ना ब्रिटेन ने रक्षा सौदे की जाँच रोकी14 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का सम्मेलन19 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना हज के लिए पोलियो का टीका ज़रुरी12 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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