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मंगलवार, 25 सितंबर, 2007 को 13:42 GMT तक के समाचार
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विश्व समस्याएँ सुलझाने का आहवान
अहमदीनेजाद और बान की मून
अहमदीनेजाद के भाषण का उत्सुकता से इंतज़ार है
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने वार्षिक अधिवेशन के अपने पहले उदघाटन भाषण में दुनिया की कई अहम समस्याओं का हल निकालने पर ज़ोर दिया.

उन्होंने सूडान के दारफ़ुर संकट, मध्य पूर्व, लेबनान और इराक़ की स्थिति की चर्चा की और कहा कि संयुक्त राष्ट्र अपनी तरफ़ से इन समस्याओं का हल निकालने का भरपूर प्रयास करेगा.

उन्होंने बर्मा में जारी राजनीतिक संकट की भी चर्चा की और घोषणा की कि वे अपने विशेष सलाहकार को बर्मा की यात्रा पर जल्द ही भेज रहे हैं, उन्होंने बर्मा की सैनिक सरकार से अनुरोध किया वह विरोध प्रदर्शन करने वालों से संयत व्यवहार करे.

बान की मून ने संयुक्त राष्ट्र को एक बेहतर, चुस्त और प्रासंगिक संगठन बनाने पर ज़ोर दिया, उन्होंने कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र के कामकाज में पारदर्शिता लाने के हामी हैं.

उन्होंने कहा, "संयुक्त राष्ट्र में भी जलवायु परिवर्तन होना चाहिए, यहाँ की जलवायु में अधिक व्यावहारिकता और उत्तरदायित्व लाना मेरी प्राथमिकता है."

संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस वार्षिक सत्र में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के भाषणों पर ख़ास नज़र रहेगी.

संभावना है कि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश अपने भाषण में ख़ासतौर से मानवाधिकारों और स्वतंत्रता का मुद्दा उठाएंगे.

ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद से उम्मीद की जा रही है कि वह अपने भाषण में देश के परमाणु कार्यक्रम पर फिर से यह आश्वासन दोहराएंगे कि यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.

फ्रांस के नए राष्ट्रपति निकोलस सरकोज़ी के लिए यह पहला मौक़ा होगा जब उन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने का मौक़ा मिलेगा.

संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में हर देश के राष्ट्राध्यक्ष या सरकार के मुखिया को संबोधन का मौक़ा मिलता है. हालाँकि कुछ देश कभी-कभी अपने विदेश मंत्री को भी इस सत्र में भेज देते हैं.

एजेंडा

सिर्फ़ 15 मिनट के इस भाषण में हर देश अनिर्धारित करता है कि वह क्या-क्या ख़ास मुद्दे उठाना चाहता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को क्या संदेश देना चाहता है.

लूला और बुश
लूला और बुश के भाषणों पर भी नज़र रही

सत्र में वैसे तो कोई विषय या मुद्दा एजेंडे का हिस्सा नहीं होता है लेकिन महत्वपूर्ण देशों के भाषण पर ख़ास नज़र रहती है क्योंकि उससे ही उनकी विदेश नीति में किसी बदलाव या ठहराव का पता चलता है.

इस सत्र को सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून संबोधित करेंगे और उनके बाद देशों के प्रतिनिधियों के संबोधन का सिलसिला चलेगा.

ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइस इनाशियो लूला दा सिल्वा को इस सत्र में सबसे पहले भाषण देने का मौक़ा मिलेगा और उनके बाद अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश संबोधित करेंगे.

मंगलवार को ही जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल भी इस वार्षिक सत्र को संबोधित करेंगी. पूरे सत्र में लगभग 200 भाषण होंगे और त्रिनिदाद एंड टोबेगो के प्रतिनिधि को सबसे अंत में भाषण देने का मौक़ा मिलेगा.

न्यूयॉर्क में मौजूद बीबीसी संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है कि संभावना व्यक्त की जा रही है कि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश अपना भाषण उन्हीं मुद्दों पर केंद्रित रखेंगे जो उनके राष्ट्रपति कार्यकाल में छाए रहे हैं, मसलन, स्वतंत्रता के फैलाव की ज़रूरत, लोकतंत्रक के हिमायतों को पुरस्कृत करना वग़ैरा.

यह भी संभावना है कि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश बर्मा की सैन्य सरकार - जुंटा के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों की भी घोषणा करेंगे. ग़ौरतलब है कि बर्मा में बौद्ध भिक्षु सैन्य सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं.

ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद सोमवार को भी उसी तरह के ना समझौता करने वाले मूड में नज़र आए जैसेकि वे अक्सर रहते हैं. सोमवार को उन्होंने न्यूयॉर्क के कोलंबिया विश्वविद्यालय में एक भाषण में उन्होंने कहा कि हिटलर के शासन के दौरान यहूदियों के नरसंहार के बारे में इतिहास की फिर से जाँच-पड़ताल होनी चाहिए.

अहमदीनेजाद ने यह भी कहा कि उनके देश को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु कार्यकम चलाने का पूरा अधिकार है.

फ्रांस के नए राष्ट्रपति निकोलस सरकोज़ी के भाषण का भी इंतज़ार रहेगा क्योंकि उन्होंने विदेश नीति में ख़ासे बदलाव लाने की पहल की है.

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