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याहू के ख़िलाफ़ लगे गंभीर आरोप | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में मानवाधिकार क्षेत्र में सक्रिय एक संगठन ने इंटरनेट कंपनी याहू के ख़िलाफ़ दायर याचिक में एक कोर्ट के समक्ष आरोप लगाया है कि वह चीन में कथित मानवाधिकार हनन और उत्पीड़न से संबंधित है. 'द वर्ल्ड ऑर्गेनाइज़ेशन फ़ॉर ह्यूमन राइट्स' ने एक अमरीकी कोर्ट को बताया कि चीन की सरकार को याहू की वेबसाइट इस्तेमाल करने वाले दो पत्रकारों के बारे में जानकारी दी गई जिसके कारण उन्हें बंदी बना लिया गया. चीनी पत्रकार वैंग शियोनिंग, उनकी पत्नी यू लिंग और पत्रकार शी ताओ और कुछ अन्य लोगों ने सैन फ़ैंसिस्को की एक अदालत में याहू के ख़िलाफ़ याचिका दायर की है. नैतिक ज़िम्मेदारी का सवाल इन पत्रकारों ने चीन की सरकार की आलोचना करते हुए कुछ ई-मेल लिखे थे और जब याहू ने चीन की सरकार को जानकारी दी तो उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया. इनके वकील का कहना है कि याहू ने अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी नहीं निभाई है. इसके बाद विदेशों में काम कर रही अमरीकी इंटनेट कंपनियों की ज़िम्मेदारी पर अमरीका में बहस छिड़ गई है. याहू ने मजबूरी जताई बहस इस विषय पर केंद्रित है कि इन कंपनियों की वेबसाइट इस्तेमाल करने वालों की पहचान को सुरक्षित रखने की कितनी ज़िम्मेदारी है. उधर याहू ने ज़ोर देकर कहा है कि जहाँ-जहाँ उसकी वेबसाइट देखी जाती है, उसके लिए वहाँ उन देशों के स्थानीय क़ानूनों का पालन करना अनिवार्य है. लेकिन उसने ये भी माना है कि चीनी अधिकारियों को जानकारी दिए जाने के कारण ये गिरफ़्तारियाँ हुई हैं. एक बयान में याहू ने कहा है कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निजी जानकारी को सुरक्षित रखने की पक्षधर है लेकिन वह ऐसी तकनीक ढूँढने की कोशिश में जुटी है जिससे मानवाधिकारों से जुड़ी चिंताओं का समाधान हो सके. | इससे जुड़ी ख़बरें इंटरनेट कंपनी याहू अब भी घाटे में11 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना याहू को भारी मुनाफ़ा 16 जनवरी, 2003 | कारोबार याहू ने नाम बचाया20 फ़रवरी, 2003 | कारोबार याहू को 300 करोड़ रुपये का मुनाफ़ा09 अक्तूबर, 2003 को | कारोबार याहू भारत में केंद्र खोलेगा14 जुलाई, 2003 | कारोबार अब गूगल का वेब कैलेंडर भी14 अप्रैल, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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