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साज़िश के लिए उम्र कैद की सज़ा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंदन में दो वर्ष पहले 21 जुलाई को बम धमाके करने की साज़िश रचने के आरोप में चार व्यक्तियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है. मुख़्तार इब्राहीम, यासीन उमर, रम्ज़ी मोहम्मद और हुसैन उस्मान को कम से कम 40 वर्ष जेल में गुज़ारने होंगे. उन्हें सोमवार को बम धमाकों की साज़िश रचने का दोषी करार दिया गया था. फ़ैसला सुनाते हुए जज फुलफर्ड ने कहा, "तीन अंडरग्राउंड ट्रेनों और एक बस में धमाका करने की साज़िश बहुत पुख़्ता थी और बड़ी संख्या में लोग मारे जा सकते थे." दो अन्य लोगों मन्फ़ो कवाकु और अदेल याह्या के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों की नए सिरे से सुनवाई होगी क्योंकि जूरी उनके मामले में फ़ैसले तक नहीं पहुँच सकी थी. जस्टिस फुलफर्ड ने कहा कि 21 जुलाई के हमले की साज़िश 7/7 के हमलों से जुड़ी थी जिसमें 52 लोगों की मौत हो गई थी. जज ने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि ये सात जुलाई और 21 जुलाई की साज़िश अल क़ायदा की बड़ी योजना का हिस्सा थी." जज ने कहा कि उनका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को मारने का था और यह सब उन्होंने अच्छी तरह सोच-समझकर किया था इसलिए अगले चालीस वर्ष तक इनमें से किसी के जेल से छूटने की संभावना नहीं होगी. अभियोजन पक्ष की सू हैमिंग की दलील थी कि ये लोग 7 जुलाई 2005 के हमले का हाल देख चुके थे और उन्हें अच्छी तरह पता था कि वे जो करने जा रहे हैं उसका परिणाम क्या होगा. सरकारी वकील ने कहा कि इन लोगों ने लंदन की परिवहन व्यवस्था को निशाना बनाने का फ़ैसला किया था और कई महीनों तक बहुत गी बारीक़ी से योजना बनाते रहे थे. सू हैमिंग ने कहा, "भले ही वे धमाके करने में नाकाम रहे लेकिन उनके इरादे बहुत ख़तरनाक थे, वे बहुत बड़े पैमाने पर जान-माल का नुक़सान करना चाहते थे इसलिए उन्हें सख़्त सज़ा ही मिलनी चाहिए." | इससे जुड़ी ख़बरें ब्रिटेन: एक संदिग्ध के ख़िलाफ़ आरोप तय07 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना संदिग्ध लोगों में दो भारतीय डॉक्टर03 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना 21 जुलाई धमाकों में गिरफ़्तारी22 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना 'तीन संदिग्ध हमलावर पाकिस्तानी मूल के'13 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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