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'माई वार' ने जीता ब्लूकर पुरस्कार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में तैनाती के दौरान युद्ध के बाद के हालात के ब्लॉग्स पर आधारित अमरीकी सैनिक कोल्बी बज़ेल की पुस्तक को ब्लूकर पुरस्कार दिया गया है. यह पुरस्कार ब्लॉग्स पर आधारित पुस्तकों के लिए दिया जाता है. कोल्बी बज़ेल की पुस्तक 'माई वार:किलिंग टाइम इन इराक़' को वर्ष 2007 का लुलु ब्लूकर पुरस्कार दिया गया है. पन्द्रह देशों से मिली 110 प्रविष्टियों में से कोल्बे की पुस्तक को सर्वश्रेष्ठ आंका गया. इसके तहत 10 हज़ार डॉलर यानी करीब पाँच लाख़ रुपए की राशि प्रदान की गई है. कड़ा रुख़ गौरतलब है कि अमरीकी सरकार सैनिकों पर बिना अनुमति के ब्लॉग लिखने पर कड़ा रुख़ अपना रही है. ब्लूकर पुरस्कार का चयन करने वाली समिति के अध्यक्ष पॉल जोंस ने कहा, "माई वार, शायद सैन्य ब्लॉग पर आख़िरी स्पष्ट और खुली पुस्तक हो." ब्लूकर पुरस्कार की एक अन्य जज अरियाना हफ़िंगटन ने कहा कि बज़ेल की किताब में चौंकाने वाली अनगिनत बातें हैं. उन्होंने कहा, "इस पुस्तक में इराक़ युद्ध की ज़मीनी हक़ीकत को बेबाक तरीके से बयाँ किया गया है." बज़ेल ने इराक़ में नियुक्त होने के तुरंत बाद सेना के टेंट में स्थित साइबर कैफ़े से ही ब्लॉग लिखने शुरू किए थे. हालाँकि बाद में अमरीकी सेना ने ब्लॉग लिखने पर पाबंदी लगा दी, लेकिन तब तक बज़ेल का ब्लॉग ख़ासा लोकप्रिय हो गया था. स्तंभकार और ब्लूकर के जज निक कोहेन ने कहा, "यह परंपरागत मीडिया पर ब्लॉग की जीत जैसा है." | इससे जुड़ी ख़बरें इंटरनेट यूजर्स को 'टाइम' का सलाम17 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना मिस्र में ब्लॉगर को जेल की सज़ा22 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना डीबीसी पियर को मिला बुकर पुरस्कार15 अक्तूबर, 2003 को | पहला पन्ना कूट्सी को साहित्य का नोबेल02 अक्तूबर, 2003 को | पहला पन्ना पाई पटेल ने दिलवाया बुकर23 अक्तूबर, 2002 | पहला पन्ना सात भारतीयों को प्रतिष्ठित एलिस सम्मान14 मई, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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