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समुंदर के पानी का नमकीन होना! | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
समुद्र का पानी नमकीन क्यों होता है. ये सवाल पूछा है रांची झारखंड से गुनगुन ने और पिपरा कनक, कुशीनगर उत्तर प्रदेश से मोहम्मद हसमुद्दीन सिद्दीक़ी ने. समुद्र से भाप उठती है जिससे बादल बनते हैं और बारिश होती है और इसी से नदियों और झरनों में पानी आता है. नदियों और झरनों के पानी में प्रकृति के अन्य पदार्थों से आए लवण घुलते हैं. लेकिन क्योंकि उनकी मात्रा कम होती है इसलिए नदी झरनों का पानी हमें मीठा ही लगता है. लेकिन जब यह पानी समुद्र में पहुंचता है तो वहां लवण जमा होते जाते हैं. इनमें ख़ास दो लवण हैं सोडियम और क्लोराइड जो नमक बनाते हैं इनका आवास काल बहुत लंबा होता है यानी जब ये समुद्र में पहुंच जाते हैं तो करोड़ों साल तक वहीं जमा रहतें है. इसीलिए समुद्र का पानी हमें खारा लगता है. प्रमोद कुमार पूछते हैं एम सी सी क्या है. एम सी सी का पूरा नाम है मैरिलेबॉन क्रिकेट क्लब जो क्रिकेट का सबसे प्रसिद्ध क्लब है. इसकी स्थापना 1787 में हुई थी. इससे पहले अभिजात और कुलीन वर्ग के पुरुष इज़लिंगटन में क्रिकेट खेला करते थे. लेकिन जैसे-जैसे लंदन की जनसंख्या बढ़ी, खेल देखने वालों की भीड़ जमा होने लगी. तब क्लब के एक गेंदबाज़ टॉमस लॉर्ड से कोई ऐसा मैदान ढूंढने को कहा गया जो निजी हो. लंदन के मैरिलेबॉन इलाक़े में डॉरसैट फ़ील्ड्स नामके मैदान का पट्टा लिया गया और इसतरह मैरिलेबॉन क्रिकेट क्लब की स्थापना हुई. एक साल के बाद इसने क्रिकेट के नियम बनाए और आज भी यह क्रिकेट के नियमों का अभिरक्षक माना जाता है. एम सी सी नामक एक अन्य संगठन भी है – माओइस्ट कम्युनिस्ट सेंटर. वापमंथी विचाराधारा वाला यह संगठन मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाक़ों में सक्रिय है. क्रिकेट की भाषा में लैगकटर या ऑफ़कटर क्या होता है. यह सवाल किया है गणपत भांभु ने, गांव धीरोणियो की ढ़ाणी, बाड़मेर राजस्थान से. जो मध्यम गति के या तेज़ गति के गेंदबाज़ होते हैं वो लैग कटर या ऑफ़ कटर गेंद फेंकते हैं. ऑफ़ कटर गेंद ऑफ़ स्पिन गेंद की ही तरह होती है लेकिन तेज़ गति की होती है. स्पिन गेंद पिच पर गिरने के बाद धीमी गति से घूमती है जबकि ऑफ़ कटर गेंद बड़ी तेज़ी के साथ ऑफ़ ब्रेक की तरफ़ आती है या लैग ब्रेक की तरफ़ बहुत तेज़ी के साथ बाहर की तरफ़ जाती है. कुवैत से अलाउद्दीन ख़ान पृथ्वी का व्यास और उसकी गति जानना चाहते हैं.
अगर पृथ्वी को भूमध्यरेखा पर एक सिरे से दूसरे सिरे तक बींधा जाए तो उसका व्यास होगा 12756.3 किलोमीटर. जहां तक पृथ्वी की गति का सवाल है वह अपनी धुरी पर लगभग 24 घंटे में एक चक्कर लगाती है. इस हिसाब से उसकी गति 1670 किलोमीटर प्रति घंटा हुई जबकि उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर यह न के बराबर होती है. जैसा कि हम जानते हैं पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने के साथ साथ सूर्य का चक्कर भी लगाती है जिसमें उसे लगभग 365 दिन लगते हैं. इस परिक्रमा में उसकी गति 30 किलोमीटर प्रति सैकेंड रहती है. दिल्ली का पुराना क़िला कब बना. इस पर किस-किसका राज रहा. जानना चाहते हैं ग्राम मिलक हाशिम, रामपुर उत्तर प्रदेश से अब्दुल रहीम. पुराना क़िला उस जगह पर खड़ा है जहां शायद पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ हुआ करती थी. सन 1955 में इस क़िले के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों के धंसने के बाद वहां से कुछ ऐसे बर्तन मिले जो कोई एक हज़ार साल पुराने बताए जाते हैं. बहरहाल बादशाह हुमायूं ने 1533 में यहां दीनपनाह नामक एक गढ़ बनाना शुरू किया. 1540 में जब शेर शाह सूरी ने हुमायूं को हराकर दिल्ली और आगरा पर क़ब्ज़ा कर लिया तो दीनपनाह को गिराकर वहां एक क़िला बनवाया. लेकिन कहा जाता है कि वो इसे पूरा नहीं करवा पाए और जब हुमायूं का इस पर फिर क़ब्ज़ा हुआ तो उन्होंने इसे पूरा कराया. इसके तीन दरवाज़े हैं हुमायूं दरवाज़ा, तलक़ी दरवाज़ा और बड़ा दरवाज़ा. इसके परिसर में जो इमारतें अब भी खड़ी हैं उनमें शेर शाह सूरी की बनवाई मस्जिद है और लाल पत्थर की एक अष्टभुजाकार दोमंज़िला इमारत शेर मंडल है जिसे बाद में हुमायूं ने पुस्तकालय के रूप में इस्तेमाल किया और इसी के ज़ीने से फिसलकर हुमायूं की मृत्यु हुई. विद्यापति के ग्रंथ किन-किन भाषाओं में हैं और कितने ग्रंथ प्रकाशित हैं. यह जानना चाहते हैं मैलाम मधुबनी बिहार के ललित नारायण झा. विद्यापति मध्ययुगीन भारत के उन वैष्णव संतों में से हैं जिन्होंने राधा कृष्ण की स्तुति में पद लिखे थे. उनके संकलित ग्रंथ को कीर्तिलता के नाम से जाना जाता है. इन्हें बहुत महत्वपूर्ण इसलिए माना जाता है क्योंकि इन्होंने मैथिली भाषा में अपने पद लिखे. जबकि बांगला भक्ति संप्रदाय के बाकी वैष्णव संतों ने बांगला में लिखा जिनमें चंडीदास और चैतन्य महाप्रभु प्रमुख हैं. एड्स और एचआईवी का पूरा नाम क्या है. गांव श्रीनगर, पूर्णियां बिहार से कौशल कुमार झा. एड्स का पूरा नाम है एक्वायर्ड इम्यूनो डैफ़िशिऐंसी सिन्ड्रॉम. यानी ऐसी स्थिति जिससे आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता क्षीण हो जाए. और एचआईवी का पूरा नाम है ह्यूमन इम्यूनो डैफ़िशिऐंसी वायरस यानी वह वायरस जो आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को क्षीण कर दे. भारत में चमड़े का सिक्का किसने चलाया था. गांधी टोला, गोड्डा झारखंड से मनोज कुमार पंडित. कहा जाता है कि एक बार निज़ाम सक्का ने मुग़ल बादशाह हुमायूं की जान बचाई थी जिसके बदले में बादशाह ने उसे एक दिन के लिए बादशाह बनाया था. क्योंकि निज़ाम एक भिश्ती था इसलिए उसने चमड़े के सिक्के जारी किए थे. |
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