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'ब्रेक और रिवर्स गियर नहीं है' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने देश के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम के बारे में कहा है कि वह हर हाल में जारी रहेगा. परमाणु कार्यक्रम के बारे में उन्होंने कहा, "यह एक ऐसी रेलगाड़ी है जिसमें न तो ब्रेक है और न ही रिवर्स गियर." उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है जबकि दुनिया की प्रमुख शक्तियाँ ईरान के ख़िलाफ़ की जाने वाली कार्रवाई पर विचार करने जा रही हैं. ईरानी उप राष्ट्रपति मनोशेर मोहम्मदी ने कहा है कि परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने के लिए उनका देश किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है, "युद्ध के लिए भी." ईरानी राष्ट्रपति के भाषण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अमरीकी विदेश मंत्री कॉन्डोलिज़ा राइस ने कहा है कि ईरान को रिवर्स गियर की नहीं बल्कि 'स्टॉप' का बटन दबाने की ज़रूरत है. अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा कि अगर ईरान यूरेनियम संवर्धन रोक देता है तो वे ईरानी अधिकारियों से मिलकर बातचीत करने को तैयार हैं. इससे पहले अमरीकी उप राष्ट्रपति डिक चेनी ने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर वह पश्चिमी देशों की माँग की अनदेखी जारी रखता है तो उसके ख़िलाफ़ सैनिक शक्ति के प्रयोग का विकल्प खुला है. इस बीच पाकिस्तान में सात मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी किए गए बयान में कहा गया है कि इस गंभीर टकराव का हल कूटनीतिक तरीक़े से निकाला जाए. रॉकेट इससे पहले ईरान ने घोषणा की कि उसने अंतरिक्ष में अपना पहला रॉकेट सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया है. सरकारी टेलीविज़न पर हुई घोषणा में कहा गया है कि इस रॉकेट में शोध कार्य के लिए सामग्री भेजी गई है. इसके अलावा और जानकारी नहीं दी गई है. टेलीवीज़न पर ईरान के एयरोस्पेस शोध केंद्र के प्रमुख मोहसेन बहरामी के हवाले से कहा गया कि रॉकेट में वो सामग्री है जिसे विज्ञान और रक्षा मंत्रालय शोध के लिए उपयोग करेंगे. ईरान का अपना सैटेलाइट प्रोग्राम है लेकिन अब तक वो अपने सैटेलाइटों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए रूस पर निर्भर करता रहा है. वर्ष 2005 में रूस में बने ईरान के उपग्रह को रूसी रॉकेट के ज़रिए छोड़ा गया था. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा माना जा रहा है कि ईरान के रॉकेट में जो तकनीक इस्तेमाल की गई है वो उसकी मिसाइल शहाब-3 से ही ली गई है. संवाददाता का कहना है कि अगर ईरान ने रॉकेट छोड़ा है तो इसका मतलब है कि धरती के पर्यावरण से बाहर भेजने की तकनीक ईरान ने हासिल कर ली है. जिसका मतलब है कि अब ईरान लंबी दूरी की मिसाइल बना सकता है. परमाणु विवाद ईरान ने ये रॉकेट ऐसे समय प्रक्षेपित किया है जब परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले से ही पश्चिमी देशों से उसका तनाव चल रहा है. संयुक्त राष्ट्र ने ईरान को यूरेनियम संवर्धन रोकने के लिए 21 फ़रवरी 2007 तक का समय दिया था. संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी आईएईए की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन रोकने के बारे में दी गई संयुक्त राष्ट्र की समयसीमा को नज़रअंदाज़ कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँचों स्थायी सदस्य देश और जर्मनी ईरान के ख़िलाफ़ और सख़्त प्रतिबंध लगाने पर सोमवार को लंदन में चर्चा करेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें अहमदीनेजाद परमाणु कार्यक्रम पर अड़े23 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना ईरान पर प्रतिबंध सख़्त होने की संभावना22 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना 'बुश प्रशासन ईरान मुद्दे पर सतर्कता बरते'12 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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