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बर्मा पर अमरीकी प्रस्ताव गिरा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बर्मा में मानवाधिकारों के उल्लंघन को ख़त्म करने संबंधी एक अमरीकी प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस और चीन ने वीटो कर दिया है. अमरीका के इस प्रस्ताव के तहत बर्मा के सैन्य शासन से अनुरोध किया गया था कि वह राजनीतिक विपक्षी दलों और अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न ख़त्म करे. अमरीका के बनाए इस प्रस्ताव के मसौदे में बर्मा में लोकतंत्र समर्थक नेता आँग सान सू ची समेत सभी राजनीतिक क़ैदियों को रिहा किए जाने का आहवान किया गया था. उधर संयुक्त राष्ट्र में रूस और चीन के प्रतिनिधियों का कहना है कि बर्मा की सैनिक सरकार क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए ख़तरा नहीं है. उनका ये भी कहना है इस मामले की चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद उचित जगह नहीं है क्योंकि ये मामला उसके अधिकार क्षेत्र के बाहर है. सुरक्षा परिषद के नए अस्थायी सदस्य दक्षिण अफ़्रीका ने भी रूस और चीन के साथ इस प्रस्ताव का विरोध किया. कतर, इंडोनेशिया और रिपब्लिक ऑफ़ कॉंगो के प्रतिनिधि मतदान के दौरान मैजूद नहीं रहे जबकि नौ अन्य देशों ने इसका समर्थन किया. संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी दूत एलेजांद्रो वॉल्फ़ का कहना था कि वर्ष 1972 के बाद रूस और चीन के एक साथ वीटो के इस इस्तेमाल से उन्हें काफ़ी निराशा हुई है. उधर रूस के प्रतिनिधि विटाली चुरकिन का कहना था कि वे सुरक्षा परिषद में उन मामलों की चर्चा की कोशिशों के ख़िलाफ़ हैं जो मुद्दे उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें आंग सान सू ची की हिरासत बढ़ाई 27 मई, 2006 | पहला पन्ना सू ची के लिए अन्नान का आग्रह23 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना बर्मा में आलोचना के बावजूद सम्मेलन17 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना बर्मा का फीका शहीद समारोह19 जुलाई, 2003 | पहला पन्ना सूची की रिहाई कब?15 जून, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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