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निर्दोषों को मारना बड़ी ग़लती थीः नैटो | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नैटो का कहना है अफ़ग़ानिस्तान में निर्दोष लोगों की हत्या करना वर्ष 2006 की उसकी सबसे बड़ी ग़लती थी. नैटो के नेतृत्व वाली सेना के प्रवक्ता ने कहा कि हमारी कोशिश है कि सैन्य अभियानों में निर्दोष लोगों को कम से कम नुकसान पहुँचे. हालाँकि उन्होंने कहा कि नैटो ने 2006 में तालेबान के मुक़ाबले बहुत ही कम संख्या में निर्दोष लोगों को मारा है. उन्होंने कहा तालेबान ने एक सौ से ज़्यादा आत्मघाती हमले किए. नैटो के प्रवक्ता रिचर्ड नुगी ने कहा, "नैटो अपनी रणनीति में परिवर्तन करने पर विचार कर रहा है ताकि आम लोगों को कम से कम नुकसान हो". उन्होंने कहा, "मैं मानता हूँ कि हम लोगों ने ग़लती की है और अब हम इस बात पर ग़ौर कर रहे हैं कि यह ग़लती फिर न दोहराई जाए". पिछले महीने राष्ट्रपति हामिद करजई ने चरमपंथियों और नैटो सेनिकों के हाथों निर्दोष लोगों और बच्चों की मौतें रोकने में नाकामी पर चिंता जताई थी. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति इन दिनों आम नागरिकों की हत्या के मामले में काफ़ी दबाव में है. नैटो सैनिकों पर इस बात का आरोप लगाया जाता रहा है कि उसने सैन्य अभियानों में बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों की हत्या की है. अधिकारियों का कहना है कि अक्तूबर में नैटो सैनिकों ने एक गाँव में एक परिवार के 20 लगों को मार डाला था. तालेबान के हमलों और नैटो सैनिकों के अभियान में अभी तक चार हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए हैं जिनमें बड़ी संख्या में निर्दोष आम नागरिक शामिल थे. | इससे जुड़ी ख़बरें 'नैटो को तालेबान से निपटना होगा'18 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना पोलैंड नैटो को एक हज़ार सैनिक और देगा14 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'सैनिकों की तैनाती के नियमों में ढिलाई' 29 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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