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सोमवार, 11 दिसंबर, 2006 को 03:25 GMT तक के समाचार
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बच्चे, कुपोषण और महिलाओं के अधिकार
बच्चे
'महिलाओं को फ़ैसले लेने का अधिकार हो तो दक्षिण एशिया में 1.3 करोड़ बच्चे कुपोषित न हों'
संयुक्त राष्ट्र बालकोष यानि यूनिसेफ़ ने पाया है कि जहाँ महिलाओं को घरेलू फ़ैसलों से अलग रखा जाता है वहाँ बच्चों में कुपोषण की संभावना अधिक है.

यूनिसेफ़ के अनुसार दक्षिण एशिया में यदि महिलाओं को परिवार के बारे में फ़ैसले करने का अधिकार हो तो कम से कम 1.3 करोड़ बच्चे कुपोषित न हों.

यूनिसेफ़ के अध्ययन के अनुसार घर-परिवार में पुरुषों और महिलाओं में असमानता से बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है और परिवार की ग़रीबी भी बढ़ती है.

यूनिसेफ़ ने दुनिया के 30 देशों में पारिवारिक फ़ैसलों पर सर्वेक्षण किया है और पाया है कि पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता से विकासशील देशों में बच्चों की ग़रीबी और सेहत पर असर पड़ सकता है.

ये परिणाम यूनिसेफ़ की दुनिया के बच्चों के बारे में वर्ष 2007 की रिपोर्ट में दिए गए हैं.

हालाँकि, विस्तृत रिपोर्ट सोमवार शाम को जारी की जाएगी लेकिन इस बार परंपरा से अलग हटते हुए बच्चों पर यूनिसेफ़ की ये रिपोर्ट महिलाओं की जिंदगी के बारे में है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान का कहना है, "विकास के मामले में महिलाओं को अधिकार देने जैसा और कोई प्रभावी कदम नहीं है."

 विकास के मामले में महिलाओं को अधिकार देने जैसा और कोई प्रभावी कदम नहीं है
कोफ़ी अन्नान

उनका कहना है, "विभिन्न उम्र की महिलाओं के साथ भेदभाव से दुनिया में न केवल लड़कियों बल्कि सभी बच्चों को अपनी प्रतिभा का उपयोग करने का मौक़ा नहीं मिलता."

रिपोर्ट के अनुसार जहाँ पारिवारिक फ़ैसले पुरुष करते हैं वहाँ परिवार की सेहत और खाद्य पदार्थों पर कम पैसे ख़र्च होते हैं जिससे बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है.

इस रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की पारिवारिक स्थिति का असर राजनीतिक जगत में देखने को मिलता है.

जहाँ महिलाओं का सरकार में हिस्सेदारी होती है वहाँ नीतियों का ध्यान बच्चों और परिवारों पर केंद्रित होता है.

लेकिन रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं का विश्व की संसदों में प्रतिनिधित्व कम है और ये शिक्षा, सामाजिक रवैए और उन पर काम के बोझ के कारण है.

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