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जॉन बोल्टन ने पद छोड़ने की घोषणा की | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत जॉन बोल्टन ने घोषणा की है कि वे अगले कुछ दिनों में अपना पद छोड़ देंगे. व्हाइट हाउस की एक प्रवक्ता ने घोषणा की है कि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भी जॉन बोल्टन के फ़ैसले को हरी झंडी दे दी है. जॉन बोल्टन अमरीकी संसद के मौजूदा सत्र के बाद अपना पद छोड़ देंगे. जॉन बोल्टन को अस्थायी तौर पर संयुक्त राष्ट्र में राजदूत का पद दिया गया था क्योंकि अमरीकी कांग्रेस में अवकाश का समय था. हालाँकि अमरीकी सीनेट ने उनके नाम को मंज़ूरी नहीं दी थी. नवंबर में हुए मध्यावधि चुनाव के बाद डेमोक्रेट सीनेटर जो बिडेन ने कहा था कि वे जॉन बोल्टन के नाम पर विचार करने तक को तैयार नहीं. उम्मीद जताई जा रही है बिडेन सीनेट की विदेश मामलों की समिति की अध्यक्षता करेंगे. नवंबर में मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति बुश की रिपब्लिकन पार्टी को करारा झटका लगा था. जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार जीत हासिल की थी. चुनाव के बाद रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड ने भी त्यागपत्र दे दिया था. उग्र स्वभाव उग्र स्वभाव के कहे जाने वाले जॉन बोल्टन का इस पद पर चयन हमेशा से ही विवादो में घिरा रहा है.यहाँ तक कि उनके कामकाज के तरीक़ों पर भी सवाल उठाए गए. मध्यावधि चुनावों के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी का जब अमरीकी संसद में प्रभाव बढ़ा तभी ये लगभग स्पष्ट हो गया था कि जान बोल्टन को उनके पद से हटाया जा सकता है. डेमोक्रेटिक पार्टी का मानना है कि वो विभिन्न पक्षों के बीच मतभेद कम करने में विफल रहे हैं. बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि इसके बावजूद राष्ट्रपति बुश नही चाहते थे कि उन्हें हटाया जाए. वो शायद इसलिए कि व्हाइट हाउस का एजेंडा आगे बढ़ाने की भूमिका उन्होनें प्रभावी रूप से निभाई है. ख़ासकर उत्तर कोरिया द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण के बाद उस पर प्रतिबंध लगाने के लिए लाए गए प्रस्ताव पर. संयुक्त राष्ट्र में सुधार के संबंध में अमरीका के हितों के प्रति जॉन बोल्टन ख़ासे सजग थे. अब जॉन बोल्टन का स्थान कौन लेगा- इस पर चर्चा तेज़ है. अभी तक जो अनुमान लगाए जा रहे हैं उनमें सबसे ऊपर नाम इराक़ में अमरीकी राजदूत ज़लमय ख़लीलज़ाद का चल रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें संयुक्त राष्ट्र और अमरीका में ठनी08 जून, 2006 | पहला पन्ना ईरान पर परमाणु कार्यक्रम के आरोप15 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना दूत की नियुक्ति पर बुश को धक्का12 मई, 2005 | पहला पन्ना बोल्टन के नाम पर सीनेट में मतदान टला21 जून, 2005 | पहला पन्ना बोल्टन से सीनेट के कड़े सवाल जवाब12 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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