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तुर्की में पोप की यात्रा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पोप बेनेडिक्ट की तुर्की यात्रा से दो दिन पहले इस्तांबुल में हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन किया. पुलिस ने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन में पच्चीस हज़ार से ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया. प्रदर्शनकारी ‘मत आओ पोप’ के बैनर हवा में लहरा रहे थे और पोप के बारे में अपमानजनक नारे लगा रहे थे. इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान एक इस्लामिक पार्टी ने किया था. पार्टी के नेताओं का कहना है कि वे पोप के सितंबर में दिए उस बयान से नाराज़ हैं जिसमें इस्लाम को हिंसा से जोड़ा गया था. उधर वैटिकन से पोप बेनेडिक्ट ने तुर्की के लोगों, नेताओं और तुर्की के इतिहास के प्रति सम्मान और दोस्ती के भाव व्यक्त किए हैं. पहली यात्रा मंगलवार से शुरु हो रही ये यात्रा पोप बैनेडिक्ट की पहली तुर्की यात्रा है. इस यात्रा में पोप इस्तानबुल की नीली मस्ज़िद में भी जाएँगे. जानकार इस मौक़े को महत्वपूर्ण मानते हैं. इन विरोध प्रदर्शनों से पहले इस्लामिक पार्टी के एक वरिष्ठ नेता उस्मान युमाकोगुल्लारी ने कहा, "हम सभी धर्मों और उनके प्रतिनिधियों का सम्मान करते हैं लेकिन हमारी आस्था के ख़िलाफ़ जाने वाले वक्तव्यों पर हम चुप नहीं रह सकते." सितंबर के महीने में पोप के उस बयान का सारी दुनिया के मुस्लिम देशों ने विरोध किया था जिसमें पोप ने 14वीं शताब्दी के एक ईसाई बादशाह के कुछ ऐसे वक्तव्यों का हवाला दिया था जिनमें उस बादशाह ने हज़रत मोहम्मद की बुराई की थी. हालाँकि पोप ने कहा था कि ये उनके शब्द नहीं थे और बाद में पोप ने अपने शब्दों के लिए माफ़ी भी मांगी थी. | इससे जुड़ी ख़बरें मुस्लिम औरतें बुरक़ा क्यों पहनती हैं?06 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना 'पश्चिम और मुस्लिमों के बीच खाई बढ़ी'13 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'मुस्लिम विद्वानों ने स्पष्टीकरण माना'14 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना विवादों के बावजूद तुर्की जाएँगे पोप16 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना वैटिकन ने भी बुरक़े पर एतराज़ जताया14 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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