|
हत्या के लिए सैनिक को जेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक अमरीकी मरीन सैनिक को एक इराक़ी नागरिक की हत्या में भाग लेने के लिए 18 महीने की जेल की सज़ा सुनाई गई है. सात महीने पहले सैनिक जॉन जोदका ने कथित तौर पर आठ अन्य सैनिकों के साथ मिलकर एक बुज़ुर्ग व्यक्ति की पिटाई करने के बाद हत्या कर दी थी. मारे गए व्यक्ति 52-वर्षीय बुजुर्ग थे और शारीरिक रूप से लाचार था. उधर एक अलग घटना में एक अन्य अमरीकी सैनिक ने उन आरोपों को स्वीकार किया है कि उसने एक 14 वर्ष की इराक़ी लड़की के साथ बलात्कार करने के बाद उसकी और उसके परिवार की हत्या कर दी थी. जेम्स बार्कर नाम के उस सैनिक ने बुधवार को अपने ख़िलाफ़ कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ऐसा स्वीकार किया और उसके वकील ने अपील की है कि उसे मौत की सज़ा न दी जाए. गवाही भी देंगे उधर 52-वर्षीय बुज़ुर्ग की हत्या के मामले में आरोप स्वीकार करने वाले मरीन सैनिक अपने अन्य सैन्य सहयोगियों के ख़िलाफ़ गवाही देने के लिए तैयार हो गए हैं. उनका कहना है कि उन्होंने मारे गए इराक़ी व्यक्ति परिवार के सदस्यों से सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगी है. यदि ये आरोप साबित होते हैं तो अन्य अभियुक्तों को मौत की सज़ा सुनाई जा सकती है. समझा जा रहा है कि ये सैनिक एक कथित विद्रोही की तालाश में मारे गए व्यक्ति के घर पर पहुँचे थे लेकिन जब कथित विद्रोही मिल नहीं पाया तो गुस्से में उन्होंने 52-वर्षीय बुज़ुर्ग को अपना निशाना बनाया. | इससे जुड़ी ख़बरें रम्सफ़ेल्ड पर युद्धापराध जाँच की माँग14 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'इराक़ युद्ध के कारण डेढ़ लाख की मौत'10 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना इराक़ नीति में बदलाव के संकेत10 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'सद्दाम को सज़ा मील का पत्थर'06 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना अमरीकी अधिकारी ने माफ़ी माँगी23 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना 'इराक़ में अमरीका अहंकारी और मूर्ख'22 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||