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समलैंगिक पादरियों को लेकर मतभेद | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के एपीस्कोपल चर्चों ने समलैंगिक पादरियों की नियुक्ति रोकने की दुनिया भर एंग्लिकन चर्चों की अपील को ठुकरा दिया है. संवाददाताओं का कहना है कि चर्चों के उपप्रमुखों की परिषद के इस निर्णय से दुनिया के एँग्लिकन चर्चों में विभाजन की स्थिति बन गई है. अमरीकी चर्च ने वर्ष 2003 में समलैंगिक पादरी जीन रॉबिन्सन की नियुक्ति की, तभी से रूढ़िवादी एंग्लिकन नाराज़ हैं. बुधवार को हालांकि इस मामले पर पुनर्विचार हो सकता है. पादरियों के सदन में समलैंगिक पादरियों पर रोक के सवाल को फिर उठाया जा सकता है लेकिन इसके लिए उपप्रमुखों को अपना पुराना निर्णय बदलना होगा जिसमें उन्होंने दो तिहाई बहुमत से समलैंगिक पादरियों पर रोक लगाने का फ़ैसले का विरोध करने का निर्णय लिया था. दो दिन पहले एक क़दम आगे बढ़ाते हुए एक महिला को चुन कर एक और उग्र निर्णय लिया गया था. बिशप कैथरीन जेफ़र्ट्स शोरी ने साफ़ कहा था कि उनकी राय में समलैंगिकता कोई पाप नहीं है. समलैंगिक पादरियों की नियुक्ति के सवाल पर अफ़्रीका और एशिया के कई रुढ़िवादी एँग्लिकन चर्चों ने अमरीकी चर्चों से नाता तोड़ लिया है. वे विशेषकर जीन रॉबिन्सन की नियुक्ति से नाराज़ हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें चीन-वेटिकन तनाव बढ़ने की आशंका14 मई, 2006 | पहला पन्ना ब्रिटेन के पहले काले आर्चबिशप30 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना समलैंगिकता के सवाल पर चर्चों में फूट25 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना समलैंगिक पादरी ने अपना पद संभाला02 नवंबर, 2003 | पहला पन्ना समलैंगिक पादरी पर नए आरोप04 अगस्त, 2003 | पहला पन्ना समलैंगिक पादरी को मंज़ूरी06 अगस्त, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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