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ब्रिटेन के पहले काले आर्चबिशप | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
डॉक्टर जॉन सेनटमू चर्च ऑफ़ इंग्लैंड के पहले काले आर्चबिशप बन गए हैं. डॉक्टर जॉन सेनटमू ने यॉर्क के आर्चबिशप के तौर पर ज़िम्मेदारी संभाली है. बुधवार को हुए एक समारोह के दौरान उन्हें ये ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. युगांडा मूल के डॉक्टर सेनटमू चर्च ऑफ़ इंग्लैंड के 'आर्चबिशप ऑफ़ कैंटरबरी' के बाद दूसरे स्थान पर रहेंगे. यूगांडा में उन्होंने कुछ देर तक वकालत की और फिर 1974 में ब्रिटेन आए. डॉक्टर सेनटमू इसाई धर्म के एक ऐसे प्रचारक रहे हैं जिनका क़द काफ़ी बड़ा माना जाता है. साथ ही उनकी छवि एक ऐसे व्यक्ति की है जो संवेदनशील सामाजिक विषयों पर भी बेबाक राय देते हैं. लोगों का मानना है कि धर्म के भीतर काफ़ी मतभेदों वाले समलैंगिक संबंधों और समाज की बदलती नैतिकताओं जैसे मामलों को लेकर माना जाता है कि उनकी उपस्थिति काफ़ी महत्वपूर्ण साबित होगी. 'उदारवादी छवि' कुछ मामलों में सेनटमू काफ़ी उदारवादी विचारधारा के हैं. वह अलग अलग नस्लों और जातियों के बीच संबंधों में सुधार का समर्थन करते हैं और इंग्लैंड के पहले काले आर्चबिशप के रूप में उनकी नियुक्ति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. डॉक्टर सेनटमू महिलाओं को बिशप बनाए जाने का समर्थन करते हैं और चर्च ऑफ़ इंग्लैंड में समलैंगिकों के ख़िलाफ़ चल रही विचाराधारा के ख़िलाफ़ हैं. लेकिन साथ ही वह चर्च की पारंपरिक विचारधारा को भी सही मानते हैं. उदाहरण के तौर पर सेक्स संबंधों के बारे में उनकी राय यही है कि ये विवाहित महिला और पुरूष के बीच ही होना चाहिए. अफ़्रीकी मूल का होने के बावजूद उनके विचारों को वहाँ किस तरह से लिया जाएगा ये कहना अभी मुश्किल होगा. अफ़्रीका के कुछ बिशप अमरीका में समलैंगिक बिशप की नियुक्ति से ख़ासे नाराज़ हैं. ऐसे में डॉक्टर सेनटमू की ओर से समलैंगिकों के प्रति उदार रवैये के आह्वान को वो किस तरह देखेंगे इस पर भी सब की निगाह रहेगी. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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