|
'एक हज़ार ब्रितानी सैनिकों ने सेना छोड़ी' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2003 में इराक़ युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक एक हज़ार से भी ज़्यादा ब्रितानी सैनिक सेना की नौकरी छोड़ चुके हैं. वहीं ब्रितानी रक्षा मंत्रालय ने इस बात से इनकार किया है कि ब्रितानी सैनिक इराक़ युद्ध के चलते सेना से भाग रहे हैं. कोर्ट मार्शल के दौरान सैनिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने स्वीकार किया है कि पिछले कुछ समय में उनके पास आने वाले ऐसे सैनिकों की संख्या बढ़ी है जो इराक़ में अपनी नियुक्ति से बचना चाहते हैं. इस साक्ष्य का पता तब लगा जब ब्रिटेन की संसद में एक कानून बनाने का प्रस्ताव पेश किया गया. इसके तहत सैनिक दूसरे देश में जाकर काम करने की स्थिति में काम करने से इनकार नहीं कर सकेंगे. वर्ष 2005 में ही 377 सैनिक सेना छोड़ गए थे और कई अभी तक लापता हैं .वहीं इस वर्ष भी अभी तक 189 सैनिक काम छोड़ चुके हैं. चिंताजनक स्थिति रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उनकी ओर से ऐसे कोई आंकड़े नहीं रखे जाते हैं जिसमें सैनिकों के 'भागने' की घटनाओं में बढ़ोत्तरी की बात कही गई हो. पर लेबर पार्टी के सासंद मेकडॉनेल ने संसद को बताया कि पिछले तीन वर्षों में इसमें तीन गुना तक बढ़ोत्तरी हुई है. मेकडॉनेल ने यह बात संसद में इस कानून पर हो रही बहस में कही. कानून के तहत दूसरे देशों में नियुक्ति से इनकार करने वाले सैनिकों को उम्रक़ैद की सज़ा जैसे दंड देने पर विचार हो रहा है. हालांकि अभी तक इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है कि सैनिकों के इस तरह काम छोड़ने का कारण उन्हें इराक़ भेजना ही है या फिर इसके पीछे पारिवारिक समस्याओं जैसी दूसरी वजहें भी हैं. सैन्यकर्मियों के हवाले से ऐसे कई सबूत मिल रहे हैं जिसके मुताबिक इराक़ में लगातार संघर्ष की स्थितियों के कारण इनका मनोबल नीचे गिरा है. और उनके काफ़ी प्रयासों के बावजूद कम सुधार ही देखने को मिल रहा है. ऐसे ही एक सैन्यकर्मी बैन ग्रिफ़िन ने अपने कमांडिंग अफ़सर को बताया कि वह दोबारा इराक़ नहीं जाना चाहता क्योंकि उसने कई अमरीकी सैनिकों को ऐसी कार्रवाइयां करते हुए देखा है जो दरअसल ग़ैरकानूनी हैं. बैन को सेना छोड़ने की अनुमति मिल गई है और अब वह बताते हैं, "मैं अमरीकी सैनिकों को रोज़मर्रा के बर्ताव से क्षुब्ध था. वे इराक़ियों के साथ अमानवीय ढंग से पेश आते थे. उनके मन में इराक़ी लोगों और वहाँ की संपत्ति के लिए कोई आदर नहीं है." ग्रिफ़िन ने दूसरे सैनिकों को सेना से न 'भागने' की सलाह दी है लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि अगर किसी को कोई बात ग़लत लगती है तो वे अपनी अंतरआत्मा की आवाज़ सुनें. | इससे जुड़ी ख़बरें ब्रितानी सैनिक भी आरोपों के घेरे में30 अप्रैल, 2004 | पहला पन्ना 'इराक़ में डेढ़ लाख सैनिक तैनात होंगे'02 दिसंबर, 2004 | पहला पन्ना प्रताड़ना के ख़िलाफ़ नए दिशा-निर्देश08 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना आदेश नहीं मानने के मामले की जाँच15 अक्तूबर, 2004 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||