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इराक़ में दूसरे दिन भी कर्फ़्यू जारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ी सरकार ने देश के कुछ हिस्सों में हिंसा के बाद शुक्रवार को लगाए कर्फ़्यू को शनिवार तक बढ़ा दिया है. दुकानें और दफ़्तर बंद हैं और अख़बार भी प्रकाशित नहीं हो रहे. इराक़ के प्रधानमंत्री इब्राहीम जाफ़री ने कहा कि अल अस्करी मज़ार और क्षतिग्रस्त हुई सुन्नी मस्जिदों का पुनर्निमाण किया जाएगा. इब्राहिम जाफ़री ने ऐसे प्रदर्शनों पर रोक लगाने की भी घोषणा की है जिसमें सशस्त्र लोग शामिल हों. दिन का कर्फ़्यू, बुधवार को समारा में शियाओं के पवित्र स्थल अल अस्करी मज़ार पर बम विस्फोट के बाद भड़की हिंसा के बाद लगाया गया था. इस हिंसा में अल अस्करी मज़ार का स्वर्ण गुंबद ध्वस्त हो गया था. बुधवार के बाद से हिंसा में कम से कम 130 लोग मारे जा चुके हैं जिसमें अधिकतर सुन्नी हैं. ख़बर है कि हिंसा के दौरान जिस इराक़ी पत्रकार की मौत हो गई थी, उसके जनाज़े के दौरान गोलीबारी हुई. ये स्पष्ट नहीं है कि गोलीबारी किसने की या कोई हताहत हुआ या नहीं. शांति की अपील अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने सभी से संयम बरतने की अपील की है. उनका कहना था कि यह इराक़ी लोगों के लिए चुनौती का समय है. शुक्रवार को लगाए कर्फ़्यू के बाद हिंसा में कमी आई थी. राजधानी बग़दाद की सड़कें सूनी रहीं. शुक्रवार को नमाज़ के मौके पर शिया और सुन्नी नेताओं ने लोगों से एकता की अपील की. शियाओं के प्रमुख राजनीतिक नेता अब्दुल अज़ीज़ अल हाक़िम ने कहा कि जिन लोगों ने अल अस्करी मज़ार पर हमला किया वो इराक़ के सुन्नियों का प्रतिनिधित्व नहीं करते. टीवी पर दिए बयान में उन्होंने चरमपंथी नेता अबू मुसाब अल ज़रकावी और पूर्वी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन पर हमला किया और कहा कि इन्हें मिटाने के लिए लोगों को एकजुट होना पड़ेगा. शियाओं के धार्मिक नेता मुक़तदा अल सद्र ने भी लोगों से कहा है कि वे संयम बरतें. उन्होंने कहा," हम दुश्मन नहीं है हम भाई हैं. जो भी मुसलमान पर हमला करता है वो मुसलमान नहीं." बसरा में भी संयुक्त शिया-सुन्नी प्रदर्शन किए गए. राजनीतिक तनाव इराक़ में राजनीतिक स्थिति भी तनावपूर्ण बनी हुई है. सुन्नी गुटों ने गठबंधन सरकार बनाने के लिए हो रही बातचीत में अब हिस्सा न लेने की बात कही है. पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से यह आशंका बढ़ गई है कि इराक़ में गृहयुद्ध न भड़क उठे. लेकिन इराक़ी विदेश मंत्री होशिया ज़ेबारी ने कहा है कि देश को गृहयुद्ध में नहीं जाने दिया जाएगा. इराक़ी राष्ट्रपति जलाल तालाबानी ने गुरूवार को सभी राजनीतिक गुटों की आपात बैठक बुलाकर तनाव को कम करने की कोशिश की थी. लेकिन मुख्य सुन्नी दल इराक़ी एकॉर्ड फ़्रंट ने इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया था. इस बीच इराक़ के प्रधानमंत्री ने कहा है कि इराक़ में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें इराक़ में तनाव और कर्फ़्यू24 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना इराक़ में हिंसा में 130 लोग मारे गए23 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना इराक़ में शिया-सुन्नी हिंसा भड़की23 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना बसरा में 11 सुन्नी क़ैदियों की हत्या23 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना अल हादी और अल अस्करी मज़ार22 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना वीडियोः अल अस्करी मज़ार को नुक़सान22 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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