|
श्रीलंका में दोनों पक्ष हिंसा रोकने पर राज़ी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों(एलटीटीई) के बीच जिनीवा बैठक में हिंसा को रोकने और अप्रैल में शांति वार्ता दोबारा शुरू करने पर सहमति बनी है. जिनीवा में दो दिनों की बातचीत के बाद गुरूवार शाम एक संयुक्त बयान में यह जानकारी दी गई. बयान में कहा गया, "दोनों पक्ष युद्धविराम समझौते का पालन करने और हिंसा टालने के लिए हरसंभव प्रयास करने को कटिबद्ध हैं." दोनों पक्षों के बीच अगली बातचीत के लिए 19 से 21 अप्रैल की तारीख़ तय की गई है. यह बातचीत भी जिनीवा में ही आयोजित की जाएगी. बातचीत में मध्यस्थ के रूप में शामिल नॉर्वे के विशेष दूत एरिक सोल्हाइम ने जिनीवा बैठक के परिणाम को उम्मीद से कहीं ज़्यादा बताया. सोल्हाइम ने वर्ष 2002 में दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम समझौता कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. टकराव युद्धविराम के बाद दोनों पक्षों के बीच शांति स्थापित करने के लिए कई दौर की बातचीत हुई थी लेकिन वर्ष 2003 में यह प्रक्रिया ठप पड़ गई थी जिसे अब दोबारा शुरू किया गया है. पिछले वर्ष नवंबर में महिंदा राजपक्षे के राष्ट्रपति बनने के बाद देश में हिंसा की नई लहर पैदा हो गई है जिसमें 80 सैनिकों समेत 120 लोग मारे जा चुके हैं. ज़्यादातर सैनिक बारूदी सुरंगों के धमाकों में मारे गए हैं और श्रीलंका की सरकार इसके लिए तमिल विद्रोहियों को ज़िम्मेदार ठहराती है लेकिन विद्रोही इन आरोपों को ग़लत बताते हैं. एलटीटीई का कहना है कि तीन महीनों में 40 विद्रोही सुरक्षा बलों के हाथों मारे जा चुके हैं, श्रीलंका की सरकार का कहना है कि तमिल विद्रोह अपने ही अलग-अलग गुटों के संघर्ष में मारे गए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका सरकार और विद्रोहियों की वार्ता22 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस दक्षिण अफ़्रीका हारा, श्रीलंका फ़ाइनल में07 फ़रवरी, 2006 | खेल श्रीलंका सरकार और विद्रोहियों की वार्ता06 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||