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इतिहासकार को मिली जेल की सज़ा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रितानी इतिहासकार डेविड इरविंग को ऑस्ट्रिया की एक अदालत ने तीन वर्ष के कारावास की सज़ा दी है. इरविंग पर आरोप था कि उन्होंने हिटलर के काल में यहूदियों के सामूहिक संहार (होलोकॉस्ट) की घटना को मिथ्या बताया था. इरविंग ने अपनी ग़लती स्वीकार कर ली थी और उन्होंने कहा था, "मैंने यह कहकर ग़लती की थी कि ऑशवित्ज़ में कोई गैस चैंबर नहीं था." सज़ा सुनाए जाने के बाद इरविंग ने पत्रकारों से कहा, "मुझे इस फ़ैसले से सदमा लगा है और मैं अपील करने जा रहा हूँ." इरविंग के वकील ने इस फ़ैसले को 'ज़रूरत से ज़्यादा सख़्त' बताया है. यूरोप के कई देशों में होलोकॉस्ट को झूठ कहना एक अपराध है और उसके लिए सज़ा हो सकती है, इन देशों में फ्रांस, बेल्जियम, ऑस्ट्रिया और जर्मनी शामिल हैं.
बहरहाल, इस फ़ैसले ने कार्टून विवाद के बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और किसी समुदाय की भावना के बीच टकराव से जुड़ी एक और बहस छेड़ दी है. यूके होलोकॉस्ट एडुकेशन सोसाइटी की केरेन पॉलक ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है, "होलोकॉस्ट को मिथ्या बताना सरासर यहूदी विरोध है जिसे बौद्धिकता का जामा पहनाया जाता है, इसके लिए सज़ा होनी ही चाहिए." लेकिन लेखिका डेबरा लिपस्टैड ने कहा है कि वे इस फ़ैसले से दुखी हैं, दिलचस्प बात ये है कि वर्ष 2000 में इरविंग ने डेबरा के ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा किया था जो नाकाम रहा था. डेबरा कहती हैं, "अगर सेंसरशिप की जीत होती है तो मैं ख़ुश नहीं हो सकती, जो लोग होलोकॉस्ट को मिथ्या बताते हैं उनसे सत्य और इतिहास के तथ्यों के आधार पर लड़ा जा सकता है, सेंसरशिप के सहारे नहीं." सज़ा इरविंग अदालत में हथकड़ी पहनकर अपनी किताब हिटलर्स वार के साथ आए, इस किताब में उन्होंने यहूदियों के जनसंहार की घटना को चुनौती दी है. ऑस्ट्रिया में पिछले वर्ष नवंबर महीने में इरविंग को गिरफ़्तार किया गया था, उनके ख़िलाफ़ 1989 में वारंट जारी किया गया था जब उन्होंने एक भाषण में कहा था किऑशवित्ज़ में गैस चैंबर नहीं थे. वे ऑस्ट्रिया में दक्षिणपंथी छात्रों की एक सभा को संबोधित करने जा रहे थे तभी पुलिस ने उन्हें एक हाइवे पर गिरफ़्तार कर लिया. उनके ख़िलाफ़ सिर्फ़ एक दिन की सुनवाई हुई जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि 1989 में उन्होंने कहा था कि होलोकॉस्ट में लाखों यहूदियों के मारे जाने की बात सही नहीं है, उन्होंने कहा कि यह बात उन्होंने होलोकॉस्ट के लिए ज़िम्मेदार माने जाने वाले एडोल्फ़ इचमैन की निजी फ़ाइल के आधार पर कही थी. इरविंग ने यह भी कहा था कि हिटलर को होलोकॉस्ट की कोई जानकारी नहीं थी और गैस चैंबर के मौजूद होने की बात सिर्फ़ कपोल-कल्पना है. उन्होंने कहा है कि अब उनके वे विचार नहीं हैं जो 1989 में थे, उनका कहना है कि नए-नए तथ्य सामने आते रहते हैं और लोग उसी के हिसाब से धारणा बनाते हैं, मेरी धारणा बदल गई है. उनका कहना है कि उन्हें ईमानदारी से विचार प्रकट करने के लिए सज़ा दिया जाना ग़लत है. | इससे जुड़ी ख़बरें ऑशवित्ज़ जनसंहार के साठ वर्ष पूरे27 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना 'नाज़ी पोशाक' पर प्रिंस हैरी ने माफ़ी मांगी13 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना 'आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध विश्वयुद्ध जैसा'02 जून, 2004 | पहला पन्ना माफ़ी नहीं माँगी: बरलुस्कोनी04 जुलाई, 2003 | पहला पन्ना चर्च और नाज़ियों के संबंध 29 दिसंबरजनवरी, 2002 | पहला पन्ना तलाश नाज़ी विमान की29 नवंबर, 2002 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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